वापस आ जाओ, मेरी महबूबाओ मेरी महबूबा, ओ मेरी प्यारी,एक बार फिर वापस आ जाओ।जैसे लंबी रात के बादसुबह की पहली किरण लौट आती है,वैसे ही मेरे जीवन मेंफिर से तुम लौट आओ।मैं आज भी बैठा हूँ तुम्हारे इंतज़ार में,मेरे पास खामोशी हैऔर दिल के भीतर तुम्हारी याद।बाहर की राह आज भी खाली है,लेकिन मेरा दिल अब भी मानता है—शायद किसी पलतुम्हारे कदमों की आहट सुनाई दे।तुम्हारे बिना
ओ मेरी महबूबा, ओ मेरी प्यारी,
एक बार फिर वापस आ जाओ।
जैसे लंबी रात के बाद
सुबह की पहली किरण लौट आती है,
वैसे ही मेरे जीवन में
फिर से तुम लौट आओ।
मैं आज भी बैठा हूँ तुम्हारे इंतज़ार में,
मेरे पास खामोशी है
और दिल के भीतर तुम्हारी याद।
बाहर की राह आज भी खाली है,
लेकिन मेरा दिल अब भी मानता है—
शायद किसी पल
तुम्हारे कदमों की आहट सुनाई दे।
तुम्हारे बिना
मेरे भीतर कुछ भी ठीक से ठहरता नहीं।
दिन गुजरते हैं,
रातें गुजरती हैं,
दुनिया अपने रास्ते पर चलती रहती है,
लेकिन फिर भी
सब कुछ अधूरा-अधूरा लगता है।
तुम केवल मेरी प्रेमिका नहीं हो,
तुम मेरे साधारण दिनों में
छिपा हुआ एक अर्थ बन गई हो।
तुम दूर होती हो
तो खुशियाँ भी अधूरी लगती हैं।
हँसी आती है,
लेकिन उसकी वजह खो जाती है।
शाम खूबसूरत होती है,
लेकिन उसमें ठहरने के लिए
जैसे कोई अपना नहीं होता।
चाँद चमकता है,
सितारे रोशनी देते हैं,
फिर भी आकाश
कुछ ज्यादा ही अकेला लगता है।
वापस आ जाओ, मेरी महबूबा।
मैं यह नहीं कहता
कि तुम्हारे बिना दुनिया रुक जाएगी।
दुनिया चलती रहेगी।
लेकिन मेरा दिल मानता है
कि तुम्हारे पास होने से
जीवन कुछ और खूबसूरत हो जाता है।
मुझे हमेशा के वादे नहीं चाहिए।
मैं यह भी नहीं चाहता
कि तुम मेरे लिए पूरी दुनिया जीत लो।
बस कुछ देर
मेरे पास बैठ जाओ।
हमारे बीच की खामोशी को
कुछ कहने दो।
जो बातें होंठ नहीं कह पाए,
शायद आँखें उन्हें
फिर से कह दें।
मैंने सीखा है
कि प्रेम हमेशा उत्सव नहीं होता।
कभी प्रेम इंतज़ार होता है।
कभी प्रेम
चुपचाप बैठकर
दिल में किसी एक नाम को
संभालकर रखने का नाम होता है।
और मैं
तुम्हारे लिए ही बैठा हूँ।
मेरे पास की कुर्सी खाली है,
लेकिन मेरी कल्पना
उसे तुम्हारी मौजूदगी से भर देती है।
मैं मन ही मन तुमसे बातें करता हूँ।
आज क्या हुआ,
आसमान कैसा था,
शाम कैसी थी—
सब कुछ तुम्हें बताने का मन करता है।
शायद तुम्हें पता नहीं
कि कितने साधारण पल
तुम्हारी याद आते ही
असाधारण बन जाते हैं।
तुम नहीं हो,
फिर भी घर घर ही है,
रास्ते रास्ते ही हैं,
बगीचे में फूल खिलते हैं,
आकाश में तारे निकलते हैं।
फिर भी सब कुछ अधूरा लगता है।
क्योंकि पूर्णता का अर्थ
हमेशा सब कुछ पा लेना नहीं होता।
कभी-कभी पूर्णता का अर्थ होता है—
ऐसे इंसान का साथ
जिसकी मौजूदगी
बाकी सारी चीज़ों को
अर्थ दे देती है।
वापस आ जाओ, मेरी महबूबा।
डर लेकर मत आना।
शिकायतों का बोझ लेकर मत आना।
बीते हुए कल को
हमारे बीच दीवार मत बनाना।
अगर कल ने हमें दुख दिया है,
तो आज हमें सिखाए
कि एक-दूसरे के प्रति
और अधिक नरम कैसे होना है।
अगर दूरी ने हमें अलग किया है,
तो यादें हमारे बीच
एक पुल बना दें।
अगर खामोशी ने हमें गलत समझाया है,
तो इस बार
हमारे दिल फिर से बात करें।
मैं तुम्हें बदलने के लिए नहीं बुला रहा।
जैसी हो, वैसी ही आओ—
अपनी मुस्कान के साथ,
अपने दुःख के साथ,
अपनी कमियों के साथ,
अपने सपनों के साथ,
अपने डर के साथ,
और अपनी उन खूबसूरत
मानवीय कमजोरियों के साथ
जो तुम्हें तुम बनाती हैं।
मैं तारों से यह नहीं कहूँगा
कि तुम्हारे बिना चमकना बंद कर दें।
मैं दुनिया से यह नहीं कहूँगा
कि तुम्हारे बिना घूमना बंद कर दे।
मैं केवल अपने दिल को
एक और मौका देना चाहता हूँ—
तुम्हारी आवाज़ सुनने का।
क्योंकि मैंने एक ऐसी सच्चाई समझी है
जिसे शब्दों में पूरी तरह कहना कठिन है—
इंसान किसी दूसरे इंसान के बिना
जी सकता है,
लेकिन फिर भी उसके भीतर
कुछ बहुत महत्वपूर्ण
खोया हुआ महसूस हो सकता है।
ज़िंदगी चलती रहती है,
लेकिन दिल इंतज़ार कर सकता है।
इसलिए मैं इंतज़ार करता हूँ।
इसलिए नहीं कि मैं कमजोर हूँ,
बल्कि इसलिए कि कुछ प्रेम
इतने धैर्यवान होते हैं
कि वे उम्मीद के दरवाज़े पर
चुपचाप बैठे रह सकते हैं।
ओ मेरी महबूबा,
एक बार फिर लौट आओ।
हमारी अधूरी कहानी का
अगला पन्ना खोलने दो।
खोई हुई हँसी को
फिर से लौटने दो।
दो थके हुए दिलों को
एक ही आसमान के नीचे बैठने दो
और फिर से यह महसूस करने दो—
शायद प्रेम खोया नहीं था,
शायद वह केवल
हमारे उसे समझने का इंतज़ार कर रहा था।
वापस आ जाओ, मेरी महबूबा।
मेरे पास तुम्हें कहने के लिए
बहुत सारी बातें हैं,
तुम्हारे साथ बाँटने के लिए
बहुत सारी खामोशियाँ हैं,
फिर से याद करने के लिए
बहुत सारी यादें हैं,
और अगर किस्मत ने अनुमति दी,
तो साथ मिलकर
बहुत सारे नए पल बनाने हैं।
तुम्हारे बिना
शायद सब कुछ मौजूद रहेगा।
लेकिन तुम्हारे साथ
हर चीज़ में
थोड़ा अधिक अर्थ दिखाई देता है।
और शायद प्रेम यही है—
दूसरा इंसान
हमारे अस्तित्व को पूरा करता है,
ऐसा नहीं;
बल्कि उसकी मौजूदगी
हमें अपने अस्तित्व को
और अधिक खूबसूरती से महसूस करना सिखाती है।
Written with AI
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