Posts

Showing posts with the label —आपके विचारों का आधार क्या है?आपके निर्णयों का

जब ज्ञान ही आपका ईश्वर बन जाए(भाग 3 – पहचान, प्रभाव और विरासत)ज्ञान और आत्म-पहचानजीवन के किसी न किसी मोड़ पर हर व्यक्ति स्वयं से पूछता है—मैं कौन हूँ?अधिकतर लोग इस प्रश्न का उत्तर बाहरी पहचान से देते हैं—मेरा पेशामेरा धर्ममेरी जाति या राष्ट्रीयतामेरी सामाजिक स्थितिलेकिन ज्ञान इस प्रश्न को और गहराई तक ले जाता है।ज्ञान पूछता है—आपके विचारों का आधार क्या है?आपके निर्णयों का plसिद्धांत क्या है?आप किस सत्य पर टिके हुए हैं?

Image
जब ज्ञान ही आपका ईश्वर बन जाए (भाग 3 – पहचान, प्रभाव और विरासत) ज्ञान और आत्म-पहचान जीवन के किसी न किसी मोड़ पर हर व्यक्ति स्वयं से पूछता है— मैं कौन हूँ? अधिकतर लोग इस प्रश्न का उत्तर बाहरी पहचान से देते हैं— मेरा पेशा मेरा धर्म मेरी जाति या राष्ट्रीयता मेरी सामाजिक स्थिति लेकिन ज्ञान इस प्रश्न को और गहराई तक ले जाता है। ज्ञान पूछता है— आपके विचारों का आधार क्या है? आपके निर्णयों का सिद्धांत क्या है? आप किस सत्य पर टिके हुए हैं? जब ज्ञान आपके जीवन का केंद्र बन जाता है, तो आपकी पहचान परिस्थितियों पर निर्भर नहीं रहती। आप केवल परिस्थितियों का परिणाम नहीं रहते, आप जागरूक व्यक्तित्व बन जाते हैं। और जागरूकता ही असली शक्ति है। बाहरी स्वीकृति बनाम आंतरिक अधिकार बहुत से लोग अपना जीवन दूसरों की स्वीकृति पाने में बिताते हैं। वे खुद को मापते हैं— प्रशंसा से पद और उपाधि से लोकप्रियता से सामाजिक मान्यता से लेकिन जो व्यक्ति ज्ञान का हो जाता है, वह विकसित करता है— आंतरिक अधिकार (Inner Authority)। आंतरिक अधिकार का अर्थ है— आलोचना से टूटना नहीं गलत समझे जाने पर घबराना नहीं प्रशंसा के बिना भ...