Posts

Showing posts with the label ज़मीन:क़ानूनन उसके स्वामित्व से बाहर हो जाती है।यह

जो ज़मीन वे छोड़ गए —आज उसका मालिक कौन है?**पाकिस्तान या बांग्लादेश चले जाने के बाद भारत में छोड़ी गई ज़मीन का कानूनी, ऐतिहासिक और मानवीय विश्लेषणहिंदी संस्करण – भाग 4 (फाइनल)अंतिम निष्कर्ष, मिथक बनाम सच्चाई, FAQ और कानूनी समापन31. मूल प्रश्न पर अंतिम उत्तरइतिहास, क़ानून, न्यायालयों और ज़मीनी हक़ीक़त को समझने के बाद अब उसी मूल प्रश्न पर लौटते हैं—जो व्यक्ति पाकिस्तान या बांग्लादेश चला गया, क्या वह भारत में अपनी ज़मीन का मालिक रहा या है?अंतिम और स्पष्ट क़ानूनी उत्तर👉 लगभग सभी मामलों में — नहीं।यदि कोई व्यक्ति:स्थायी रूप से भारत छोड़कर गयाविदेशी (पाकिस्तानी/बांग्लादेशी) नागरिकता ले लीया क़ानूनन “एवैक्यूई” घोषित हो गयातो उसकी भारत में स्थित ज़मीन:क़ानूनन उसके स्वामित्व से बाहर हो जाती है।यह कोई राय नहीं,

Image
**जो ज़मीन वे छोड़ गए — आज उसका मालिक कौन है?** पाकिस्तान या बांग्लादेश चले जाने के बाद भारत में छोड़ी गई ज़मीन का कानूनी, ऐतिहासिक और मानवीय विश्लेषण हिंदी संस्करण – भाग 4 (फाइनल) अंतिम निष्कर्ष, मिथक बनाम सच्चाई, FAQ और कानूनी समापन 31. मूल प्रश्न पर अंतिम उत्तर इतिहास, क़ानून, न्यायालयों और ज़मीनी हक़ीक़त को समझने के बाद अब उसी मूल प्रश्न पर लौटते हैं— जो व्यक्ति पाकिस्तान या बांग्लादेश चला गया, क्या वह भारत में अपनी ज़मीन का मालिक रहा या है? अंतिम और स्पष्ट क़ानूनी उत्तर 👉 लगभग सभी मामलों में — नहीं। यदि कोई व्यक्ति: स्थायी रूप से भारत छोड़कर गया विदेशी (पाकिस्तानी/बांग्लादेशी) नागरिकता ले ली या क़ानूनन “एवैक्यूई” घोषित हो गया तो उसकी भारत में स्थित ज़मीन: क़ानूनन उसके स्वामित्व से बाहर हो जाती है। यह कोई राय नहीं, यह स्थापित और अंतिम क़ानूनी स्थिति है। 32. क़ानून इतना कठोर क्यों था? यह कठोरता किसी एक व्यक्ति के विरुद्ध नहीं थी, बल्कि परिस्थितियों की उपज थी: विभाजन के समय भारी अराजकता राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंता करोड़ों शरणार्थियों का पुनर्वास अनंत संपत्ति विवादों से बच...