पद ऊँचा हुआ, स्मृति नीचे गिर गई — भाग 4स्मरण का आध्यात्मिक अर्थआध्यात्मिक दृष्टि से “अतीत को याद रखना”कोई भावुकता या nostalgia नहीं है।यह है — स्वयं को सत्य में टिकाए रखना।अतीत को याद रखने का अर्थ है—अपनी सीमाओं को पहचाननायह स्वीकार करना कि हम अकेले नहीं बनेअपनी मानवता से जुड़े रहनालगभग हर आध्यात्मिक परंपरा यही सिखाती है— जो व्यक्ति अपने स्रोत को भूल जाता है,वह धीरे-धीरे सत्य से भी कट जाता है।स्मृति आत्मा को ज़मीन से जोड़ती है।
पद ऊँचा हुआ, स्मृति नीचे गिर गई — भाग 4 स्मरण का आध्यात्मिक अर्थ आध्यात्मिक दृष्टि से “अतीत को याद रखना” कोई भावुकता या nostalgia नहीं है। यह है — स्वयं को सत्य में टिकाए रखना। अतीत को याद रखने का अर्थ है— अपनी सीमाओं को पहचानना यह स्वीकार करना कि हम अकेले नहीं बने अपनी मानवता से जुड़े रहना लगभग हर आध्यात्मिक परंपरा यही सिखाती है— जो व्यक्ति अपने स्रोत को भूल जाता है, वह धीरे-धीरे सत्य से भी कट जाता है। स्मृति आत्मा को ज़मीन से जोड़ती है। नम्रता: आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता नम्रता को अक्सर गलत समझा जाता है। लोग सोचते हैं कि नम्र होना मतलब कमज़ोर होना। असल में नम्रता है— अपने वास्तविक आकार को जानना। नम्र व्यक्ति— अपनी उपलब्धियों से इंकार नहीं करता अपनी सीमाओं को भी स्वीकार करता है प्रशंसा में खो नहीं जाता नम्रता आत्म-ज्ञान का परिणाम है। नम्रता के बिना सफलता तैरती रहती है। नम्रता के साथ सफलता टिकती है। अहंकार क्यों शक्तिशाली लगता है, पर होता कमज़ोर है अहंकार बाहर से मज़बूत दिखाई देता है— ऊँची आवाज़ सख़्त निर्णय नियंत्रण की चाह लेकिन भीतर से अहंकार डरा हुआ होता है— आलोचना से सच से ...