कीवर्डतन्हाई कविता, पुराना घर कविता, खामोशी का अर्थ, हिन्दी कविता ब्लॉग, भावनात्मक लेखन, शाम की कविता, मन के प्रतीक, रहस्यमयी घर, दार्शनिक हिन्दी लेख---# हैशटैग#कविता#हिन्दीकविता#तन्हाई#खामोशी#पुरानाघर#भावनात्मकलेखन#हिन्दीब्लॉग#Philosophy#EmotionalPoetry---🔖 मेटा डिस्क्रिप्शनतन्हाई, खामोशी और पुराने रहस्यमय घर के प्रतीकों पर आधारित एक गहरी हिन्दी कविता और विस्तृत लेख—विश्लेषण, दर्शन, कीवर्ड, हैशटैग व डिसक्लेमर सहित।---📌 मेटा लेबलPoetry | Hindi Blog | Loneliness | Philosophy
🌙 पुराने घर की सरगोशियाँ I. हिन्दी कविता “पुराने घर की सरगोशियाँ” शाम की तन्हाई में तुमने पुकारा, जैसे दिल को नर्म सा इशारा। पर जब मैं आया, तुमने कुछ न कहा— रुकूँ यहाँ या लौट जाऊँ क्या? बताओ मुझको, कहो जरा, क्या होता है उस पुराने घर में भरा? कुछ कदम आते हैं, कुछ खो जाते— अजीब सी आहटें आती-जाती रहतीं। दीवारों में दबे हैं बीते दिन, खिड़कियों में ठहरा है अनकहा क्षण। मैं तुम्हारे दरवाज़े पर खड़ा, थमा, शायद तुम एक बार बुला लो फिर से मुझे। खामोशी कभी डर से गहरी होती, क्या कोई है यहाँ, या बस हवा रोती? वो पुराना घर संदेहों में डूबा— जहाँ कुछ आते हैं, कुछ जाते डूबा-डूबा। --- II. विश्लेषण व दर्शन (केवल हिन्दी) यह कविता तन्हाई, प्रतीक्षा, खामोशी और मन के रहस्य को रूपकों के रूप में प्रस्तुत करती है। शाम का समय सबसे भावुक समय माना जाता है—जहाँ मन नरम, आँखें भारी और भावनाएँ तेज़ हो जाती हैं। पुराने घर का प्रतीक इस पुराने घर का अर्थ है— मन यादें अनकही बातें दबा हुआ दर्द पुराने रिश्तों की गूँज जहाँ “कुछ आते, कुछ जाते”— मतलब: मन में उठते-बैठते विचार बदलता व्यवहार अधूरे रिश्ते बीता हुआ समय उतार-चढ़ाव ख...