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डिस्क्लेमर (Disclaimer)यह ब्लॉग पूरी तरह से साहित्यिक और दार्शनिक अभिव्यक्ति है।यह किसी व्यक्ति, संबंध, धर्म या मानसिक उपचार का विकल्प नहीं है।इसका उद्देश्य केवलशीर्षक“फिर भी तुम मुझे इतना प्रेम क्यों करते हो?”(एक अनदेखे पक्षी की आत्मकथा)

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🌿 शीर्षक “फिर भी तुम मुझे इतना प्रेम क्यों करते हो?” (एक अनदेखे पक्षी की आत्मकथा) 🕊️ कविता (Hindi Poem) तुम मुझे इतना प्रेम क्यों करते हो? मैं एक अनजान, अनदेखा-सा छोटा पक्षी हूँ, घने और गहरे जंगल में अकेला रहता हूँ। न मेरे पास रूप की चमक है, न किसी आभूषण की शोभा, न मेरे पंखों में रंगों का कोई उत्सव। मैं खुले आकाश में नहीं उड़ता, मैं भीड़ में पहचाना नहीं जाता, पत्तों की छाया में ख़ामोशी से जीता हूँ। फिर भी तुम मुझे ढूँढ लेते हो, अंधेरे के बीच भी। जैसे ज़मीन तक पहुँचती है रोशनी, जहाँ कोई उम्मीद नहीं करता। बताओ, जब मेरे पास सिर्फ़ मेरा होना है— तो फिर भी तुम मुझे इतना प्रेम क्यों करते हो? 🌱 दार्शनिक विश्लेषण (Philosophical Analysis) यह कविता किसी पक्षी की नहीं है। यह उस इंसान की आत्मा की आवाज़ है— जिसे समाज नहीं देखता जिसकी पहचान नहीं बनती जो न सुंदरता से, न सफलता से, न शक्ति से जाना जाता है यह कविता एक मौलिक प्रश्न उठाती है: क्या प्रेम का आधार योग्यता होनी चाहिए? दर्शन कहता है— समाज मूल्य देता है उपलब्धि को, लेकिन प्रेम पहचानता है अस्तित्व को। यह कविता बताती है कि निःशर्त ...