7000 शब्दों का हिंदी ब्लॉग — PART 2SECTION 7: बंगाल के वोटर का मनोविज्ञान — दिल की भाषा और दिमाग़ की जांचपश्चिम बंगाल में वोट देना सिर्फ़ एक नागरिक कर्तव्य नहीं,बल्कि एक भावनात्मक निर्णय भी है।बंगाल के वोटर की सोच तीन परतों में दिखती है:7.1 भावनात्मक परतनेता की भाषा दिल को छूती है या नहीं?वह आम इंसान की तरह दिखता है या नहीं?7.2 बौद्धिक परत
⭐ 7000 शब्दों का हिंदी ब्लॉग — PART 2 SECTION 7: बंगाल के वोटर का मनोविज्ञान — दिल की भाषा और दिमाग़ की जांच पश्चिम बंगाल में वोट देना सिर्फ़ एक नागरिक कर्तव्य नहीं, बल्कि एक भावनात्मक निर्णय भी है। बंगाल के वोटर की सोच तीन परतों में दिखती है: 7.1 भावनात्मक परत नेता की भाषा दिल को छूती है या नहीं? वह आम इंसान की तरह दिखता है या नहीं? 7.2 बौद्धिक परत नेता की विचारधारा में स्पष्टता है या नहीं? उसके शब्दों और कार्यों में विरोधाभास है या नहीं? 7.3 सांस्कृतिक परत क्या नेता बंगाल की सांस्कृतिक आत्मा को समझता है? क्या वह धार्मिक विविधता को स्वीकारता है? अगर एक नेता इन तीनों परतों में विश्वास पैदा कर पाता है — बंगाल उसे स्वीकार करता है, चाहे चुनाव में समर्थन दे या न दे। SECTION 8: धर्म — एक पहचान, हथियार नहीं भारत के कई हिस्सों में धर्म राजनीति का मुख्य आधार बन जाता है। लेकिन बंगाल ऐसा प्रदेश है जहाँ धर्म: 🟦 पहचान है 🟩 पर प्रहार का माध्यम नहीं यहां के लोग पूछते हैं: “तुम अपना धर्म मानो — ठीक है। लेकिन मेरे धर्म को नीचा दिखाए बिना मान सकते हो?” यही बात तीनों नेताओं के प्रति धारणा ...