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Option 4: “गलत स्वास्थ्य जानकारी का मनोविज्ञान (Psychology of Health Misinformation)” — महामारी के समय गलत स्वास्थ्य जानकारी का मनोविज्ञानलोग मिथकों पर क्यों विश्वास कर लेते हैं?निपाह वायरस जैसी घातक बीमारी के समय सिर्फ वायरस ही नहीं फैलता, बल्कि डर, अफवाह और गलत जानकारी भी तेजी से फैलती है। कई बार यह गलत जानकारी वायरस से भी ज़्यादा नुकसान पहुँचा देती है। यह समझना ज़रूरी है कि लोग वैज्ञानिक तथ्यों को छोड़कर मिथकों पर क्यों भरोसा करने लगते हैं।1. डर और अनिश्चितता सोचने की क्षमता को कमजोर कर देती हैमहामारी के समय लोगों के मन में होता है—मौत का डरपरिवार को खोने का डरअस्पताल और आइसोलेशन का डरभविष्य को लेकर अनिश्चितता

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Option 4: “गलत स्वास्थ्य जानकारी का मनोविज्ञान (Psychology of Health Misinformation)” —  महामारी के समय गलत स्वास्थ्य जानकारी का मनोविज्ञान लोग मिथकों पर क्यों विश्वास कर लेते हैं? निपाह वायरस जैसी घातक बीमारी के समय सिर्फ वायरस ही नहीं फैलता, बल्कि डर, अफवाह और गलत जानकारी भी तेजी से फैलती है। कई बार यह गलत जानकारी वायरस से भी ज़्यादा नुकसान पहुँचा देती है। यह समझना ज़रूरी है कि लोग वैज्ञानिक तथ्यों को छोड़कर मिथकों पर क्यों भरोसा करने लगते हैं। 1. डर और अनिश्चितता सोचने की क्षमता को कमजोर कर देती है महामारी के समय लोगों के मन में होता है— मौत का डर परिवार को खोने का डर अस्पताल और आइसोलेशन का डर भविष्य को लेकर अनिश्चितता डर की स्थिति में इंसान जटिल वैज्ञानिक तथ्यों की बजाय सरल और तुरंत समाधान ढूँढता है। इसीलिए “रात में छींक लो”, “एक्सरसाइज़ कर लो” जैसे दावे सच्चे लगने लगते हैं। 2. “कुछ तो कर रहा हूँ” – नियंत्रण का भ्रम (Illusion of Control) मनोविज्ञान में इसे Illusion of Control कहा जाता है। जब कोई व्यक्ति— छींकने लगता है कोई विशेष अभ्यास करता है घरेलू उपाय अपनाता है त...