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भाग 2: ताक़त का भ्रम, राजनीतिक उकसावे और वास्तविक सीमाएँ“चुनौती दी तो उठा लिया जाएगा” — यह सोच क्यों गलत हैकई लोग मानते हैं कि अगर कोई नेता किसी महाशक्ति को खुलकर उकसाए, तो तुरंत जवाबी कार्रवाई होगी।लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति इस तरह काम नहीं करती।वास्तविकता यह है कि—देश भावनाओं से नहीं, रणनीति से चलते हैंफैसले गुस्से में नहीं, जोखिम के आकलन से होते हैंक़ानून, अर्थव्यवस्था, सहयोगी देश — सब कुछ देखा जाता हैराज्य व्यवस्था व्यक्तिगत लड़ाई नहीं होती।नेता कड़ी भाषा क्यों इस्तेमाल करते हैंवेनेज़ुएला के राष्ट्रपति Nicolás Maduro जैसे नेता अकसर तीखी भाषा का प्रयोग करते हैं।इसके कारण होते हैं—देश के भीतर समर्थकों को एकजुट करनाआंतरिक समस्याओं से ध्यान हटानाखुद को “विदेशी दबाव के

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भाग 2: ताक़त का भ्रम, राजनीतिक उकसावे और वास्तविक सीमाएँ “चुनौती दी तो उठा लिया जाएगा” — यह सोच क्यों गलत है कई लोग मानते हैं कि अगर कोई नेता किसी महाशक्ति को खुलकर उकसाए, तो तुरंत जवाबी कार्रवाई होगी। लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति इस तरह काम नहीं करती। वास्तविकता यह है कि— देश भावनाओं से नहीं, रणनीति से चलते हैं फैसले गुस्से में नहीं, जोखिम के आकलन से होते हैं क़ानून, अर्थव्यवस्था, सहयोगी देश — सब कुछ देखा जाता है राज्य व्यवस्था व्यक्तिगत लड़ाई नहीं होती। नेता कड़ी भाषा क्यों इस्तेमाल करते हैं वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति Nicolás Maduro जैसे नेता अकसर तीखी भाषा का प्रयोग करते हैं। इसके कारण होते हैं— देश के भीतर समर्थकों को एकजुट करना आंतरिक समस्याओं से ध्यान हटाना खुद को “विदेशी दबाव के ख़िलाफ़ रक्षक” के रूप में दिखाना यह राजनीतिक बयानबाज़ी होती है, गिरफ्तारी का निमंत्रण नहीं। क्या अमेरिका के पास सच में इतनी ताक़त है? यह सवाल स्वाभाविक है— “अगर चाहे तो क्या अमेरिका ऐसा कर सकता है?” United States की सैन्य क्षमता बहुत बड़ी है, इसमें कोई शक नहीं। लेकिन क्षमता और वैधता एक जैसी नहीं...