नाशपाती का घेराकेवल हिन्दी संस्करणI. कविताशीर्षक: नाशपाती का घेरानया साल आया, नाशपाती का दिन,ठंडी हवा में महके मधुर अनुगिन।सुनहरी धूप, मन पर लिपटती,पुराने घावों की गाँठें सुलझती।आओ सभी नाशपाती के घेरे में,ना कोई राजा, ना कोई मेरे-तेरे में।
⭐️ नाशपाती का घेरा केवल हिन्दी संस्करण I. कविता शीर्षक: नाशपाती का घेरा नया साल आया, नाशपाती का दिन, ठंडी हवा में महके मधुर अनुगिन। सुनहरी धूप, मन पर लिपटती, पुराने घावों की गाँठें सुलझती। आओ सभी नाशपाती के घेरे में, ना कोई राजा, ना कोई मेरे-तेरे में। यहाँ न सिंहासन, न ऊँच-नीच, यहाँ हर दिल है अपने आप में बीच। नाशपाती जैसी नरमी ओढ़ो, कठिनाइयों में भी मीठे रहो। डर अगर आए, थोड़ा ठहरो, आँखें बंद कर, भीतर उतर तो। नाशपाती की खुशबू में जैसे, किसी दबी हुई याद के धागे, धीरे-धीरे खुलते जाते, अपनेपन के रंग जगाते। एक बीज है नाशपाती के भीतर, वहीं से खिलता जीवन का दनकतर। बीज में छुपा है नया आरम्भ, बस विश्वास चाहिए, थोड़ा सम्बंध। घेरा मतलब एक वृत्त, एक चक्र, जहाँ दुख-सुख दोनों ही सहज। कंधे से कंधा, हाथों में हाथ, यही तो इंसानियत की बात। नया साल है, नाशपाती का दिन, अपने भीतर उतरो, बाहर नहीं। इस घेरे में एक प्रतिध्वनि है — “नरमी ही तुम्हारी असली ताक़त है।” II. अर्थ व विश्लेषण 🔍 प्रमुख प्रतीक प्रतीक संकेत नाशपाती कोमल शक्ति, मधुर धैर्य, भावनात्मक पोषण घेरा/वृत्त समानता, सामूहिकता, बिना भेदभा...