कानून-व्यवस्था, धारणा और सत्ता की राजनीतिक्या हालिया घटनाएँ सच में यह साबित करती हैं कि तृणमूल कांग्रेस 2026 का चुनाव नहीं जीत सकती?भूमिकाभारतीय लोकतंत्र में अक्सर घटनाओं से अधिक उनकी धारणा (perception) चुनावी राजनीति को प्रभावित करती है।हाल के दिनों में मुर्शिदाबाद के बेलडांगा क्षेत्र में हुई हिंसा, उसके बाद गिरफ्तारियों की संख्या बढ़कर लगभग 36 तक पहुँचना, और इस संदर्भ में Calcutta High Court की यह टिप्पणी कि यदि केंद्र चाहे तो केंद्रीय बल भेज सकता है—इन सबने एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दिया है।
कानून-व्यवस्था, धारणा और सत्ता की राजनीति क्या हालिया घटनाएँ सच में यह साबित करती हैं कि तृणमूल कांग्रेस 2026 का चुनाव नहीं जीत सकती? भूमिका भारतीय लोकतंत्र में अक्सर घटनाओं से अधिक उनकी धारणा (perception) चुनावी राजनीति को प्रभावित करती है। हाल के दिनों में मुर्शिदाबाद के बेलडांगा क्षेत्र में हुई हिंसा, उसके बाद गिरफ्तारियों की संख्या बढ़कर लगभग 36 तक पहुँचना, और इस संदर्भ में Calcutta High Court की यह टिप्पणी कि यदि केंद्र चाहे तो केंद्रीय बल भेज सकता है—इन सबने एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। इसी समय असम में एक सड़क दुर्घटना के बाद दो समुदायों के बीच हुई झड़प को राज्य प्रशासन ने अपने स्तर पर संभाल लिया। वहाँ न तो बड़े न्यायिक हस्तक्षेप दिखे और न ही राष्ट्रीय स्तर पर तीखे राजनीतिक सवाल उठे। इस तुलना से एक धारणा बन रही है— “अगर असम सरकार से कोई सवाल नहीं पूछा जा रहा, लेकिन बंगाल में बार-बार सवाल उठते हैं, तो तृणमूल सरकार विफल है और इसलिए 2026 में नहीं जीत पाएगी।” लेकिन क्या यह निष्कर्ष तर्कसंगत और तथ्यपूर्ण है, या केवल भावनात्मक प्रतिक्रिया? बेलडांगा–मुर्शिदाबाद की घटन...