Posts

Showing posts with the label रखा ही क्या है—बस अँधेरे में जड़ें जमाए दुःखों का संग्रह।

🌑 शीर्षक: खामोश गड़गड़ाहट में लिपटा हुआ एक दिल---⭐ हिन्दी कवितासीने के भीतर एक छोटा-सा कमरा है,जहाँ अनकहे जज़्बातबंद ख़तों की तरह पड़े रहते हैं।इस दिल में और रखा ही क्या है—बस अँधेरे में जड़ें जमाए दुःखों का संग्रह।

Image
🌑 शीर्षक: खामोश गड़गड़ाहट में लिपटा हुआ एक दिल --- ⭐ हिन्दी कविता सीने के भीतर एक छोटा-सा कमरा है, जहाँ अनकहे जज़्बात बंद ख़तों की तरह पड़े रहते हैं। इस दिल में और रखा ही क्या है— बस अँधेरे में जड़ें जमाए दुःखों का संग्रह। जो भी इसे छूकर देखे, वह महसूस करेगा भीतर उठती खामोश आँधियों की हल्की थरथराहट। दर्द को मैंने सँभालकर रखा है, मानो भूली हुई अलमारी में बंद स्मृतियाँ हों। --- ⭐ विश्लेषण व दर्शन (हिन्दी) आपकी मूल पंक्तियों में एक ऐसी पीड़ा बसती है जो चीखती नहीं— बल्कि धीमी आवाज़ में साँस लेती है। दिल में छुपाया गया दर्द कमज़ोरी नहीं, एक प्रकार की दृढ़ता है। क्योंकि जो लोग अपने घाव छुपाते हैं, वे दुनिया को अपने तूफ़ानों से बचाना चाहते हैं। दर्शन का सार 1. दर्द पराजय नहीं—अनुभव है। हर चोट स्मृति बनकर हमें सिखाती है। 2. खामोशी कई बार सुरक्षा है। हर दर्द को दुनिया की भीड़ में आवाज़ नहीं दी जा सकती। 3. दर्द छुपाना भी जीने का तरीका है। दिल तभी दर्द सँभालता है जब उसमें अब भी जीवन की गर्माहट बची हो। आपकी पंक्तियाँ जैसे किसी दीपक पर डाली गई पतली चादर— रोशनी भीतर है, बस दुनिया को पूर...