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भाग 3(राज्य-वार वास्तविकता, शरणार्थी आवंटन, भूमि सुधार और आज की स्थिति)**जो ज़मीन वे छोड़ गए —आज उसका मालिक कौन है?**पाकिस्तान या बांग्लादेश चले जाने के बाद भारत में छोड़ी गई ज़मीन का कानूनी, ऐतिहासिक और मानवीय विश्लेषणहिंदी संस्करण – भाग 3राज्यों की भूमिका, पुनर्वास, और ज़मीनी सच्चाई21. एक ही क़ानून, अलग-अलग राज्यों में अलग अनुभवहालाँकि एवैक्यूई संपत्ति से जुड़े क़ानून केंद्रीय थे, लेकिन उनके लागू होने में राज्यों के अनुसार बड़ा अंतर दिखा।इसके कारण थे:भूमि व्यवस्था में अंतर

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– भाग 3 (राज्य-वार वास्तविकता, शरणार्थी आवंटन, भूमि सुधार और आज की स्थिति) **जो ज़मीन वे छोड़ गए — आज उसका मालिक कौन है?** पाकिस्तान या बांग्लादेश चले जाने के बाद भारत में छोड़ी गई ज़मीन का कानूनी, ऐतिहासिक और मानवीय विश्लेषण हिंदी संस्करण – भाग 3 राज्यों की भूमिका, पुनर्वास, और ज़मीनी सच्चाई 21. एक ही क़ानून, अलग-अलग राज्यों में अलग अनुभव हालाँकि एवैक्यूई संपत्ति से जुड़े क़ानून केंद्रीय थे, लेकिन उनके लागू होने में राज्यों के अनुसार बड़ा अंतर दिखा। इसके कारण थे: भूमि व्यवस्था में अंतर रिकॉर्ड रखने की स्थिति शरणार्थियों का दबाव प्रशासनिक और राजनीतिक हालात 21.1 पश्चिम बंगाल: सबसे जटिल स्थिति पश्चिम बंगाल दो बार बड़े पैमाने पर प्रभावित हुआ: 1947 का विभाजन 1971 का बांग्लादेश युद्ध ज़मीनी हक़ीक़त: भारी संख्या में शरणार्थी एवैक्यूई ज़मीनों पर कॉलोनियाँ ज़मींदारी उन्मूलन के दौरान रिकॉर्ड गड़बड़ी नतीजा: ज़्यादातर एवैक्यूई संपत्तियाँ स्थायी रूप से आवंटित बाद के दावे लगभग सभी ख़ारिज आज बंगाल में ऐसे मुक़दमे जीतना लगभग असंभव है। 21.2 बिहार और उत्तर प्रदेश इन राज्यों में: कृषि भूमि ...