कर्तव्य, इतिहास और नैतिक निर्णय पर एक दार्शनिक चिंतनअस्वीकरण (DISCLAIMER)यह लेख एक निजी, दार्शनिक और नैतिक चिंतन है।यह किसी व्यक्ति, सरकार या राजनीतिक दल के विरुद्ध कानूनी निर्णय या आरोप प्रस्तुत नहीं करता, न ही किसी चुनावी विकल्प को प्रभावित करने का उद्देश्य रखता है।इस लेख का उद्देश्य केवल विवेक, कर्तव्य, इतिहास और नैतिक साहस पर विचार करना है।मेटा विवरण (META DESCRIPTION)पूर्व कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अभिजीत गंगोपाध्याय के सार्वजनिक जीवन में प्रवेश के संदर्भ में कर्तव्य, विवेक, इतिहास और नैतिक साहस पर एक दार्शनिक लेख।
कर्तव्य, इतिहास और नैतिक निर्णय पर एक दार्शनिक चिंतन अस्वीकरण (DISCLAIMER) यह लेख एक निजी, दार्शनिक और नैतिक चिंतन है। यह किसी व्यक्ति, सरकार या राजनीतिक दल के विरुद्ध कानूनी निर्णय या आरोप प्रस्तुत नहीं करता, न ही किसी चुनावी विकल्प को प्रभावित करने का उद्देश्य रखता है। इस लेख का उद्देश्य केवल विवेक, कर्तव्य, इतिहास और नैतिक साहस पर विचार करना है। मेटा विवरण (META DESCRIPTION) पूर्व कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अभिजीत गंगोपाध्याय के सार्वजनिक जीवन में प्रवेश के संदर्भ में कर्तव्य, विवेक, इतिहास और नैतिक साहस पर एक दार्शनिक लेख। कीवर्ड्स (KEYWORDS) अभिजीत गंगोपाध्याय, पूर्व मुख्य न्यायाधीश, न्यायिक नैतिकता, विवेक और कर्तव्य, राजनीति और दर्शन, इतिहास की स्मृति, कर्बला और न्याय, नैतिक साहस हैशटैग (HASHTAGS) #विवेकऔरकर्तव्य #नैतिकसाहस #इतिहासऔरसत्य #कर्तव्यपहले #न्यायऔरदर्शन #नामनहींसंकल्प भूमिका: वे प्रश्न जिनके पूर्ण उत्तर नहीं होते कुछ प्रश्न ऐसे होते हैं जिन्हें मनुष्य बार-बार पूछता है, लेकिन जिनका पूर्ण उत्तर कभी नहीं मिलता। “वह कितने ईमानदार हैं?” “उनका ज्ञान...