Option 3: “मिथक बनाम वैज्ञानिक तथ्य (Myths vs Scientific Evidence)” — मिथक बनाम वैज्ञानिक तथ्य: निपाह वायरस को लेकर भ्रम और सच्चाईनिपाह वायरस जैसे गंभीर रोग के दौरान सबसे बड़ा खतरा सिर्फ वायरस नहीं होता, बल्कि गलत जानकारी भी होती है। अफवाहें लोगों को वास्तविक इलाज से दूर ले जाती हैं। नीचे आम तौर पर फैले हुए मिथकों और उनके सामने रखी गई वैज्ञानिक सच्चाइयों को साफ़–साफ़ समझाया गया है।मिथक 1: “रात में छींकने से निपाह वायरस शरीर से बाहर निकल जाता है”वैज्ञानिक तथ्य: ❌ पूरी तरह गलतछींक एक प्राकृतिक रिफ्लेक्स है, कोई इलाज नहींनिपाह वायरस नाक या गले में नहीं, बल्कि शरीर की कोशिकाओं के अंदर रहता है
Option 3: “मिथक बनाम वैज्ञानिक तथ्य (Myths vs Scientific Evidence)” — मिथक बनाम वैज्ञानिक तथ्य: निपाह वायरस को लेकर भ्रम और सच्चाई निपाह वायरस जैसे गंभीर रोग के दौरान सबसे बड़ा खतरा सिर्फ वायरस नहीं होता, बल्कि गलत जानकारी भी होती है। अफवाहें लोगों को वास्तविक इलाज से दूर ले जाती हैं। नीचे आम तौर पर फैले हुए मिथकों और उनके सामने रखी गई वैज्ञानिक सच्चाइयों को साफ़–साफ़ समझाया गया है। मिथक 1: “रात में छींकने से निपाह वायरस शरीर से बाहर निकल जाता है” वैज्ञानिक तथ्य: ❌ पूरी तरह गलत छींक एक प्राकृतिक रिफ्लेक्स है, कोई इलाज नहीं निपाह वायरस नाक या गले में नहीं, बल्कि शरीर की कोशिकाओं के अंदर रहता है छींकने से वायरस बाहर नहीं निकलता उल्टा छींक से संक्रमण दूसरों में फैल सकता है ✔ चिकित्सा विज्ञान में छींक को कभी भी वायरस निकालने की प्रक्रिया नहीं माना गया है। मिथक 2: “ड्रिल एक्सरसाइज़ करने से निपाह वायरस मर जाता है” वैज्ञानिक तथ्य: ❌ गलत एक्सरसाइज़ सामान्य स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है लेकिन सक्रिय वायरल संक्रमण को खत्म नहीं कर सकती बीमारी के समय ज़्यादा एक्सरसाइज़ से: शर...