कीवर्ड्ससफलता और अहंकार, अतीत की स्मृति, कृतज्ञता, मानवता, जीवन दर्शन, सत्ता और नैतिकता#️⃣ हैशटैग#सफलता#स्मृति#कृतज्ञता#मानविकता#जीवनदर्शन#अहंकार🧾 मेटा डिस्क्रिप्शनसफलता के बाद लोग अपना अतीत क्यों भूल जाते हैं—इस विषय पर आधारित एक गहन दार्शनिक और मानवीय हिंदी लेख।अगर चाहो तो मैं इसे आगे—
पद ऊँचा हुआ, स्मृति नीचे गिर गई 🌿 कविता शीर्षक: पद ऊँचा हुआ, स्मृति नीचे गिर गई तुम्हारा पद आज बहुत ऊँचा हो गया, इसलिए बीता कल छोटा लगने लगा। जिन हाथों ने थामा था तुम्हें गिरने से, आज वही हाथ तुम्हें दिखा ही नहीं। जिस राह पर चलते हुए पाँव छिले थे, आज वही राह तुम्हें व्यर्थ लगती है। ऊँचाई की हवा में इतना हल्के हो गए, कि भारी स्मृतियाँ साथ चल नहीं पातीं। जिस इंसान को तुमने बनते देखा था, उसे ही तुमने पीछे छोड़ दिया। पर याद रखना—ऊँचाई स्थायी नहीं, भूला हुआ अतीत एक दिन प्रश्न बन जाता है। 🧠 कविता का विश्लेषण और दर्शन यह कविता सफलता के बाद मनुष्य के बदलते स्वभाव पर आधारित है। यहाँ “पद” केवल नौकरी या सत्ता नहीं, बल्कि सम्मान, पहचान और अहंकार का प्रतीक है। दार्शनिक रूप से कविता यह कहती है— ऊँचाई अक्सर मनुष्य को जड़ों से काट देती है अतीत कमजोरी की याद दिलाता है और शक्ति कमजोरी को स्वीकार नहीं करना चाहती जो व्यक्ति अपने अतीत को नकारता है, वह अपनी मानवता को भी खो देता है। इस कविता का मूल विचार है— स्मृति के बिना प्रगति अधूरी होती है। 📝 ब्लॉग: पद ऊँचा हुआ, स्मृति नीचे गिर गई भूमिका स...