शीर्षक: जब खुशियाँ तुम्हारे दरवाज़े पर ठहर जाती हैं---📌 कविता (केवल हिन्दी)जब खुशियाँ आकर ठहरें तुम्हारे दरवाज़े पर,डर मत जाना—यह सोचकर कि तुम हो ग़रीबी के सफ़र पर।एक छोटी-सी किरण भी वरदान बन जाती है,हर खुशी का पीछा करना समझदारी नहीं कहलाती है।
--- 🌟 शीर्षक: जब खुशियाँ तुम्हारे दरवाज़े पर ठहर जाती हैं --- 📌 कविता (केवल हिन्दी) जब खुशियाँ आकर ठहरें तुम्हारे दरवाज़े पर, डर मत जाना—यह सोचकर कि तुम हो ग़रीबी के सफ़र पर। एक छोटी-सी किरण भी वरदान बन जाती है, हर खुशी का पीछा करना समझदारी नहीं कहलाती है। जब आशीष खड़ा हो बिल्कुल पास तुम्हारे, मत भागो दूर हर चमक या सुख के किनारे। कभी एक पल भी दे जाता है अद्भुत शांति, हर रोशनी तुम्हारी नहीं—कई बस होती है भ्रांति। जो शांति खुद चलकर आती तुम्हारे जीवन में, उसे थाम लो, उसे रखो अपने मन के दामन में। हर आनंद नहीं होता तुम्हारी राह का साथी— कुछ चमकें बस छलावा हैं, जो देती है दिल में थकान की माथी। इसलिए जब खुशी आकर खटखटाए तुम्हारा द्वार, मत समझना खुद को छोटा, मत होने देना मन को लाचार। आशीर्वाद खिलते हैं उसी दिन सबसे अधिक, जिस दिन कृतज्ञता सीखो और मन खोलो अपने भीतर के विहंग। --- ⭐ कविता का विश्लेषण व दर्शन (हिन्दी) आपकी मूल पंक्तियाँ गहरी भावनात्मक व दार्शनिक सच्चाई रखती हैं। इनमें तीन बड़े जीवन-संदेश छिपे हैं— --- १. खुशी धन-दौलत पर निर्भर नहीं करती “Never shocked thinking yourself...