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पद ऊँचा हुआ, स्मृति नीचे गिर गई — भाग 3वास्तविक जीवन का दोहराता हुआ पैटर्नइतिहास सफलता से नाराज़ नहीं होता।इतिहास नाराज़ होता है नम्रता भूलने से।बार-बार एक ही क्रम दिखाई देता है—संघर्ष के साथ उन्नतिपहचान और अधिकारअतीत से दूरीआलोचना की अनदेखीनैतिक दृष्टि का धुंधलापनधीमा, चुपचाप पतनयह केवल राजनीति या बड़े पदों की कहानी नहीं है।यह परिवारों में, दफ्तरों में, रिश्तों में भी

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पद ऊँचा हुआ, स्मृति नीचे गिर गई — भाग 3 वास्तविक जीवन का दोहराता हुआ पैटर्न इतिहास सफलता से नाराज़ नहीं होता। इतिहास नाराज़ होता है नम्रता भूलने से। बार-बार एक ही क्रम दिखाई देता है— संघर्ष के साथ उन्नति पहचान और अधिकार अतीत से दूरी आलोचना की अनदेखी नैतिक दृष्टि का धुंधलापन धीमा, चुपचाप पतन यह केवल राजनीति या बड़े पदों की कहानी नहीं है। यह परिवारों में, दफ्तरों में, रिश्तों में भी होता है। जहाँ पद कृतज्ञता से ऊपर चला जाता है, वहीं गिरावट की नींव पड़ जाती है। आत्मविश्वास से तिरस्कार तक की सूक्ष्म यात्रा पतन अचानक नहीं आता। यह व्यवहार में छोटे-छोटे बदलावों से शुरू होता है। सुनना कम हो जाता है टोकना बढ़ जाता है सलाह आदेश में बदल जाती है धीरे-धीरे व्यक्ति प्रश्न करना छोड़ देता है। उसे लगता है कि गलती मानना कमजोरी है। यहीं सीख रुक जाती है। और जहाँ सीख रुकती है, वहीं विकास भी रुक जाता है। आस-पास के लोग चुप क्यों हो जाते हैं? जैसे-जैसे व्यक्ति ऊँचा उठता है, सच बोलना जोखिम भरा हो जाता है। लोग सोचते हैं— विरोध करने से नुकसान होगा ईमानदारी से दूरी बन सकती है चुप रहना सुरक्षित है यह च...