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कटहल के बीज, रोग प्रतिरोधक क्षमता और एड्स – सच और भ्रमहिंदी – Part 3 (विज्ञान, समाज और मिथकों की गहराई से समझ)इस तीसरे भाग में हम और गहराई से समझेंगे कि विज्ञान किसी भी स्वास्थ्य दावे को कैसे परखता है, कटहल के बीज जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थों को लेकर मिथक क्यों बनते हैं, और यह भ्रम व्यक्ति व समाज दोनों के लिए किस तरह नुकसानदायक हो सकता है। यह भाग विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो जानना चाहते हैं कि “अगर यह सच नहीं है, तो लोग इतना विश्वास क्यों करते हैं?”विज्ञान किसी दावे को कैसे स्वीकार करता हैआधुनिक चिकित्सा विज्ञान भावनाओं या व्यक्तिगत अनुभवों पर नहीं, बल्कि प्रमाण (evidence) पर आधारित होता है। किसी भी चीज़ को “इलाज” कहने से पहले कई चरण होते हैं—पहले प्रयोगशाला में उसके सक्रिय तत्वों की पहचान की जाती है,फिर नियंत्रित परिस्थितियों में परीक्षण होते हैं,उसके बाद मनुष्यों पर क्लिनिकल ट्रायल किए जाते हैं,और अंत में लंबे समय तक उसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता देखी जाती है।

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कटहल के बीज, रोग प्रतिरोधक क्षमता और एड्स – सच और भ्रम हिंदी – Part 3 (विज्ञान, समाज और मिथकों की गहराई से समझ) इस तीसरे भाग में हम और गहराई से समझेंगे कि विज्ञान किसी भी स्वास्थ्य दावे को कैसे परखता है, कटहल के बीज जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थों को लेकर मिथक क्यों बनते हैं, और यह भ्रम व्यक्ति व समाज दोनों के लिए किस तरह नुकसानदायक हो सकता है। यह भाग विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो जानना चाहते हैं कि “अगर यह सच नहीं है, तो लोग इतना विश्वास क्यों करते हैं?” विज्ञान किसी दावे को कैसे स्वीकार करता है आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भावनाओं या व्यक्तिगत अनुभवों पर नहीं, बल्कि प्रमाण (evidence) पर आधारित होता है। किसी भी चीज़ को “इलाज” कहने से पहले कई चरण होते हैं— पहले प्रयोगशाला में उसके सक्रिय तत्वों की पहचान की जाती है, फिर नियंत्रित परिस्थितियों में परीक्षण होते हैं, उसके बाद मनुष्यों पर क्लिनिकल ट्रायल किए जाते हैं, और अंत में लंबे समय तक उसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता देखी जाती है। कटहल के बीजों ने कभी भी एड्स या एचआईवी के इलाज के लिए ऐसे वैज्ञानिक परीक्षण पास नहीं किए हैं। दुनिया ...