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हिंदी संस्करण – FINAL PART (अंतिम विश्लेषण और निष्कर्ष)एक रैली, एक राज्य, और गलत निष्कर्ष का ख़तरामालदा की सभा को देखकर एक त्वरित निष्कर्ष निकालना बहुत आसान है—“इतने बड़े नेता के बावजूद अगर भीड़ नहीं आई, तो पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन असंभव है।”लेकिन यह निष्कर्ष राजनीतिक रूप से सतही और विश्लेषणात्मक रूप से जोखिमभरा है।पश्चिम बंगाल वह राज्य है जहाँ राजनीति तय होती है—लंबे सामाजिक स्मृति-बोध से

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हिंदी संस्करण – FINAL PART (अंतिम विश्लेषण और निष्कर्ष) एक रैली, एक राज्य, और गलत निष्कर्ष का ख़तरा मालदा की सभा को देखकर एक त्वरित निष्कर्ष निकालना बहुत आसान है— “इतने बड़े नेता के बावजूद अगर भीड़ नहीं आई, तो पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन असंभव है।” लेकिन यह निष्कर्ष राजनीतिक रूप से सतही और विश्लेषणात्मक रूप से जोखिमभरा है। पश्चिम बंगाल वह राज्य है जहाँ राजनीति तय होती है— लंबे सामाजिक स्मृति-बोध से स्थानीय शक्ति-संबंधों से वर्षों से बनी राजनीतिक आदतों से एक अकेली सभा, चाहे वक्ता कितना भी बड़ा क्यों न हो, इस पूरे ढाँचे का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती। मौन मतदाता: बंगाल की सबसे बड़ी लेकिन अदृश्य शक्ति बंगाल की राजनीति की सबसे अनदेखी सच्चाई है—मौन मतदाता। ये मतदाता— जनसभाओं में नहीं आते तस्वीरों में नहीं दिखते सार्वजनिक रूप से अपनी राजनीतिक पहचान नहीं बताते लेकिन मतदान के दिन वही— अंतर तय करते हैं नतीजे बदलते हैं सत्ता की निरंतरता या बदलाव का निर्णय लेते हैं मालदा में कम भीड़ का अर्थ इन मतदाताओं की अनुपस्थिति नहीं है। नेतृत्व बनाम संरचना: बंगाल की असली लड़ाई पश्चिम बंगाल में ...