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गणतंत्र दिवस के आँसू: लिखे गए और अनलिखे बलिदानहिंदी ब्लॉग – भाग 4 (चूड़ान्त)एक राष्ट्र की शक्ति उसकी स्मृति मेंकोई राष्ट्र केवल कानून बनाकर या पर्व मनाकर शक्तिशाली नहीं बनता। राष्ट्र की वास्तविक शक्ति होती है—ईमानदार स्मरण में। गणतंत्र दिवस हमें केवल संविधान की तिथि नहीं देता; यह हमें एक निरंतर जिम्मेदारी सौंपता है—कि हम स्वतंत्रता को हल्के में न लें, और बलिदान को केवल समारोह में न समेट दें।जब हम केवल वही याद रखते हैं जो दस्तावेज़ों में दर्ज है, तब इतिहास काग़ज़ तक सिमट जाता है।

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गणतंत्र दिवस के आँसू: लिखे गए और अनलिखे बलिदान हिंदी ब्लॉग – भाग 4 (चूड़ान्त) एक राष्ट्र की शक्ति उसकी स्मृति में कोई राष्ट्र केवल कानून बनाकर या पर्व मनाकर शक्तिशाली नहीं बनता। राष्ट्र की वास्तविक शक्ति होती है—ईमानदार स्मरण में। गणतंत्र दिवस हमें केवल संविधान की तिथि नहीं देता; यह हमें एक निरंतर जिम्मेदारी सौंपता है—कि हम स्वतंत्रता को हल्के में न लें, और बलिदान को केवल समारोह में न समेट दें। जब हम केवल वही याद रखते हैं जो दस्तावेज़ों में दर्ज है, तब इतिहास काग़ज़ तक सिमट जाता है। जब हम स्मृति, विवेक और नैतिकता को साथ रखते हैं, तब इतिहास मानवीय बनता है। अनलिखे जीवन और उनका नैतिक भार मुंशी अमीरुद्दीन—एक स्वतंत्रता सेनानी, कवि और कहानीकार—शायद किसी सरकारी फाइल में दर्ज नहीं हैं। उनका कारावास किसी आर्काइव में न मिले, उनकी रचनाएँ शायद वापस न आएँ। फिर भी, उनका जीवन नैतिक भार रखता है। इतिहास प्रमाण माँगता है। विवेक ईमानदारी माँगता है। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ऐसे असंख्य लोग थे—जिन्होंने जोखिम उठाया, पीड़ा सही, और आज़ादी के बाद चुपचाप गुमनामी में चले गए। उन्हें भूल जाना तट...