हिंदी – अंतिम भागअसल आग है ज़िम्मेदारीइस लेख के अंत तक पहुँचते-पहुँचते यह स्पष्ट हो जाता है किकविता का केंद्र आग नहीं है,ज़िम्मेदारी ही असली शक्ति है।आग केवल प्रकृति के नियमों का पालन करती है।वह कितनी दूर तक जाएगी, यह निर्णय मनुष्य करता है।यह त्रासदी इसलिए नहीं घटी कि आग खतरनाक थी,बल्कि इसलिए घटी क्योंकि शक्ति कोआंतरिक संयम के बिना संभाला गया।यही सबसे महत्वपूर्ण समझ है—शक्ति हटा देने से विनाश नहीं रुकता,विनाश तब रुकता है जब मनुष्य परिपक्व होता है।सीमाओं की अनदेखी की कीमत
हिंदी – अंतिम भाग असल आग है ज़िम्मेदारी इस लेख के अंत तक पहुँचते-पहुँचते यह स्पष्ट हो जाता है कि कविता का केंद्र आग नहीं है, ज़िम्मेदारी ही असली शक्ति है। आग केवल प्रकृति के नियमों का पालन करती है। वह कितनी दूर तक जाएगी, यह निर्णय मनुष्य करता है। यह त्रासदी इसलिए नहीं घटी कि आग खतरनाक थी, बल्कि इसलिए घटी क्योंकि शक्ति को आंतरिक संयम के बिना संभाला गया। यही सबसे महत्वपूर्ण समझ है— शक्ति हटा देने से विनाश नहीं रुकता, विनाश तब रुकता है जब मनुष्य परिपक्व होता है। सीमाओं की अनदेखी की कीमत हर टूटा हुआ रिश्ता, हर असफल संस्था, हर ढहती हुई व्यवस्था एक ही पैटर्न दोहराती है— सीमाएँ ज्ञात थीं, फिर भी अनदेखी की गई, संकेत शांत थे, फिर भी सुने नहीं गए, रुकने से आगे बढ़ना आसान लगा। यह कविता उसी क्षण को पकड़ती है जब आगे बढ़ना ज़िम्मेदारी नहीं रहता, बल्कि लापरवाही बन जाता है। उस रेखा के पार जाने के बाद परिणाम समझौता नहीं करते। पश्चाताप हमेशा देर से क्यों आता है इस कविता की सबसे पीड़ादायक सच्चाइयों में से एक पश्चाताप का समय है। पश्चाताप आता है जब आग बुझ चुकी होती है, जब राख बैठ चुकी होती है, ...