Posts

Showing posts with the label जो नीरवता आती है

भाग–5: ध्यानमय उपसंहार — जब पक्षी का गीत थम जाता है, तब क्या शेष रहता हैएक क्षण आता है जब पक्षी का गीत थम जाता है।न कोई संकेत,न कोई विदाई।वह उड़ जाता है—साँझ के गहराते रंगों में,अनदेखी शाखाओं की ओर,रात की तैयारी में।और हम खिड़की के पास खड़े रह जाते हैं—कुछ बदला हुआ,पर शब्दों से परे।🌿 1. गीत के बाद की नीरवतागीत के बाद जो नीरवता आती है,वह पहले जैसी नहीं होती।वह नीरवता अब—

Image
भाग–5: ध्यानमय उपसंहार — जब पक्षी का गीत थम जाता है, तब क्या शेष रहता है एक क्षण आता है जब पक्षी का गीत थम जाता है। न कोई संकेत, न कोई विदाई। वह उड़ जाता है— साँझ के गहराते रंगों में, अनदेखी शाखाओं की ओर, रात की तैयारी में। और हम खिड़की के पास खड़े रह जाते हैं— कुछ बदला हुआ, पर शब्दों से परे। 🌿 1. गीत के बाद की नीरवता गीत के बाद जो नीरवता आती है, वह पहले जैसी नहीं होती। वह नीरवता अब— खाली नहीं भारी नहीं डरावनी नहीं वह भरी हुई नीरवता होती है— शांति से, स्वीकार से, ठहराव से। यह वही नीरवता है जो समझाती नहीं, बस स्थिर कर देती है। 🕊️ 2. पक्षी जो जाने-अनजाने दे जाता है पक्षी नहीं जानता— हम थके हैं, हम अकेले हैं, हम प्रश्नों से घिरे हैं। फिर भी वह हमें दे जाता है— एक छोटा-सा विराम एक सुरक्षित अनुभूति एक ऐसा क्षण, जिसमें कुछ माँगा नहीं जाता आज की दुनिया में, जहाँ हर पल कुछ चाहता है, यह निष्काम क्षण एक अनमोल उपहार है। 🌸 3. स्मृति, जो बोझ नहीं बनती शुरू में हमने पूछा था— क्या यह किसी पुराने बाग़ की स्मृति है, या कोई अनजाना प्रेम? अब उस प्रश्न का उत्तर आवश्यक नहीं। क्योंकि स्मृति य...