अब प्रस्तुत है हिंदी संस्करण – भाग 2(क़ानून, अदालतें और राज्य का स्पष्ट रुख)**जो ज़मीन वे छोड़ गए —आज उसका मालिक कौन है?**पाकिस्तान या बांग्लादेश चले जाने के बाद भारत में छोड़ी गई ज़मीन का कानूनी, ऐतिहासिक और मानवीय विश्लेषणहिंदी संस्करण – भाग 2क़ानून, न्यायालय और राज्य की कठोर वास्तविकता11. वे क़ानून जिन्होंने ज़मीन का भविष्य तय कियाविभाजन के बाद ज़मीन का निर्णय भावनाओं से नहीं, क़ानून से हुआ। भारत सरकार ने कुछ ऐसे क़ानून बनाए जिन्होंने इस प्रश्न को लगभग हमेशा के लिए तय कर
अब प्रस्तुत है हिंदी संस्करण – भाग 2 (क़ानून, अदालतें और राज्य का स्पष्ट रुख) **जो ज़मीन वे छोड़ गए — आज उसका मालिक कौन है?** पाकिस्तान या बांग्लादेश चले जाने के बाद भारत में छोड़ी गई ज़मीन का कानूनी, ऐतिहासिक और मानवीय विश्लेषण हिंदी संस्करण – भाग 2 क़ानून, न्यायालय और राज्य की कठोर वास्तविकता 11. वे क़ानून जिन्होंने ज़मीन का भविष्य तय किया विभाजन के बाद ज़मीन का निर्णय भावनाओं से नहीं, क़ानून से हुआ। भारत सरकार ने कुछ ऐसे क़ानून बनाए जिन्होंने इस प्रश्न को लगभग हमेशा के लिए तय कर दिया। 11.1 एवैक्यूई प्रॉपर्टी (प्रशासन) अधिनियम, 1950 यह अधिनियम सबसे निर्णायक साबित हुआ। मुख्य बातें: एवैक्यूई की सभी संपत्तियाँ सरकार में निहित (vest) होंगी Custodian उस संपत्ति का एकमात्र नियंत्रक होगा पुराने मालिक के अधिकार समाप्त सामान्य दीवानी अदालतों का हस्तक्षेप सीमित सरल शब्दों में— एक बार एवैक्यूई घोषित होने पर संपत्ति निजी नहीं रहती। 11.2 विस्थापित व्यक्ति (मुआवज़ा एवं पुनर्वास) अधिनियम, 1954 इस अधिनियम का उद्देश्य था— पाकिस्तान से आए शरणार्थियों का पुनर्वास एवैक्यूई संपत्तियों का उपयो...