हिंदी संस्करण | भाग 3जब बदला हुआ इतिहास अगली पीढ़ी तक पहुँचता हैइतिहास वहीं खत्म नहीं हो जाताजहाँ घटना खत्म होती है।वह आगे बढ़ता है—कहानियों में,शिक्षा में,और आने वाली पीढ़ियों की सोच में।यहीं पर अतिशयोक्ति सबसे ज़्यादा नुकसान करती है।जब मिथक समझ की जगह ले लेता हैजब बच्चों और युवाओं को बताया जाता है—“हमारे लोग हज़ारों की संख्या में कर्बला में लड़े थे”तो वे तीन बातें सीखते हैं—भावना सत्य से बड़ी है
हिंदी संस्करण | भाग 3 जब बदला हुआ इतिहास अगली पीढ़ी तक पहुँचता है इतिहास वहीं खत्म नहीं हो जाता जहाँ घटना खत्म होती है। वह आगे बढ़ता है— कहानियों में, शिक्षा में, और आने वाली पीढ़ियों की सोच में। यहीं पर अतिशयोक्ति सबसे ज़्यादा नुकसान करती है। जब मिथक समझ की जगह ले लेता है जब बच्चों और युवाओं को बताया जाता है— “हमारे लोग हज़ारों की संख्या में कर्बला में लड़े थे” तो वे तीन बातें सीखते हैं— भावना सत्य से बड़ी है जो अच्छा लगे, वही सच। संख्या नैतिकता से ऊपर है कम लोग = कम महत्व। प्रश्न करना गलत है सवाल = अपमान। यह इतिहास नहीं, यह अंधविश्वास की शुरुआत है। “अच्छे इरादे” भी नुकसान पहुँचा सकते हैं अक्सर कहा जाता है— “इरादा तो अच्छा है, इससे एकता बढ़ती है।” लेकिन इतिहास इरादे से नहीं, परिणाम से आँका जाता है। अच्छे इरादों से गढ़े गए मिथक— जाँच में टूट जाते हैं बहस को कटु बनाते हैं और अंततः श्रद्धा को शर्मिंदगी में बदल देते हैं जब एक दावा गिरता है, लोग बाकी सच्ची बातों पर भी शक करने लगते हैं। कर्बला वंश का नहीं, विवेक का प्रश्न है Imam Husain कर्बला यह नहीं पूछता— “तुम किस परिवार में ...