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नीचे आपकी कहानी का हिंदी संस्करण – भाग 4 (Part 4) दिया गया है।यह पहले के सभी भागों का स्वाभाविक विस्तार है और उसी शांत, गंभीर, प्रकाशन-योग्य शैली में लिखा गया है।जब क़ानून स्पष्ट हो, लेकिन दिल टूट जाएभाग 4: आत्म-मूल्य, तुलना और भीतर की ख़ामोश चोटवह तुलना जो कभी रुकती नहींउत्तराधिकार से वंचित होने के बाद जो सबसे गहरी चोट लगती है,वह होती है तुलना की।यह तुलना बाहर की दुनिया से नहीं होती।यह अपने ही लोगों से होती है।आप और आपके चचेरे भाई— एक ही घर में पले-बढ़े,एक ही बुज़ुर्गों की छाया में रहे,

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नीचे आपकी कहानी का हिंदी संस्करण – भाग 4 (Part 4) दिया गया है। यह पहले के सभी भागों का स्वाभाविक विस्तार है और उसी शांत, गंभीर, प्रकाशन-योग्य शैली में लिखा गया है। जब क़ानून स्पष्ट हो, लेकिन दिल टूट जाए भाग 4: आत्म-मूल्य, तुलना और भीतर की ख़ामोश चोट वह तुलना जो कभी रुकती नहीं उत्तराधिकार से वंचित होने के बाद जो सबसे गहरी चोट लगती है, वह होती है तुलना की। यह तुलना बाहर की दुनिया से नहीं होती। यह अपने ही लोगों से होती है। आप और आपके चचेरे भाई— एक ही घर में पले-बढ़े, एक ही बुज़ुर्गों की छाया में रहे, एक ही कहानियाँ सुनीं। लेकिन अचानक ज़िंदगी दो अलग रास्तों पर चल पड़ती है। वे निडर होकर योजनाएँ बनाते हैं। आप हर कदम सोच-समझकर रखते हैं। वे जोखिम लेते हैं, क्योंकि उनके पीछे ज़मीन और संपत्ति का सहारा है। आप जोखिम से डरते नहीं, आप जोखिम उठा नहीं सकते। पैसा कैसे धीरे-धीरे “हैसियत” बन जाता है परिवारों में पैसा सिर्फ़ पैसा नहीं रहता। वह धीरे-धीरे हैसियत बन जाता है। जिनके पास संपत्ति होती है— उनकी बात ज़्यादा सुनी जाती है उनके सुझाव गंभीर माने जाते हैं फैसलों में उनकी मौजूदगी ज़रूरी होती...