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गणतंत्र दिवस के आँसू: लिखे गए और अनलिखे बलिदानहिंदी ब्लॉग – भाग 2गणतंत्र दिवस और नैतिक नागरिकतागणतंत्र दिवस हमें केवल यह याद नहीं दिलाता कि भारत एक गणराज्य है, बल्कि यह भी सिखाता है कि नागरिक होने का अर्थ क्या है। नागरिकता केवल अधिकारों का संग्रह नहीं है, बल्कि जिम्मेदारियों की भी पहचान है।जब हम संविधान का सम्मान करते हैं, तब हमें यह भी याद रखना चाहिए कि संविधान केवल कानून नहीं है—वह उन बलिदानों का परिणाम है, जो अक्सर इतिहास में दर्ज नहीं हुए।

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गणतंत्र दिवस के आँसू: लिखे गए और अनलिखे बलिदान हिंदी ब्लॉग – भाग 2 गणतंत्र दिवस और नैतिक नागरिकता गणतंत्र दिवस हमें केवल यह याद नहीं दिलाता कि भारत एक गणराज्य है, बल्कि यह भी सिखाता है कि नागरिक होने का अर्थ क्या है। नागरिकता केवल अधिकारों का संग्रह नहीं है, बल्कि जिम्मेदारियों की भी पहचान है। जब हम संविधान का सम्मान करते हैं, तब हमें यह भी याद रखना चाहिए कि संविधान केवल कानून नहीं है—वह उन बलिदानों का परिणाम है, जो अक्सर इतिहास में दर्ज नहीं हुए। एक सजग नागरिक वही है जो पूछता है: यह स्वतंत्रता किनकी देन है? किन लोगों को हमने याद रखा, और किन्हें भूल गए? अनदेखे स्वतंत्रता सेनानी भारत की स्वतंत्रता केवल बड़े नेताओं और प्रसिद्ध आंदोलनों से नहीं आई। इसकी नींव असंख्य अनदेखे स्वतंत्रता सेनानियों ने रखी। ये लोग— गाँवों और कस्बों में जागरूकता फैलाते थे कविता, कहानी और संवाद के माध्यम से विचार जगाते थे जेल गए, पर पहचान नहीं मिली आज़ादी के बाद भी सामान्य जीवन में लौट गए मुंशी अमीरुद्दीन ऐसे ही स्वतंत्रता सेनानी थे—जो नाम के नहीं, काम के लिए लड़े। कारावास: पीड़ा थी, प्रमाण नहीं कारावा...