ChatGPT को “झूठा” कहने के पीछे मनोवैज्ञानिक कारणमनुष्य स्वभाव से मशीनों को इंसान जैसा मानने लगता है। जब कोई सिस्टम:साफ़ हिंदी में बात करेतर्क के साथ समझाएविनम्र उत्तर देतो हमारा दिमाग उसे इंसानी गुण दे देता है—जैसे ईमानदारी, बेईमानी, इरादा और भावना।जब हमारी उम्मीदें टूटती हैं, तो निराशा सीधे आरोप में बदल जाती है।
यह रहा HINDI VERSION – PART 2 (विस्तृत / Expanded) ChatGPT को “झूठा” कहने के पीछे मनोवैज्ञानिक कारण मनुष्य स्वभाव से मशीनों को इंसान जैसा मानने लगता है। जब कोई सिस्टम: साफ़ हिंदी में बात करे तर्क के साथ समझाए विनम्र उत्तर दे तो हमारा दिमाग उसे इंसानी गुण दे देता है—जैसे ईमानदारी, बेईमानी, इरादा और भावना। जब हमारी उम्मीदें टूटती हैं, तो निराशा सीधे आरोप में बदल जाती है। 👉 यही वह बिंदु है जहाँ “ChatGPT झूठा है” जैसी भावना जन्म लेती है। “ChatGPT ने अपना जवाब बदल दिया” – क्या यह झूठ है? यह शिकायत बहुत आम है। लोग कहते हैं: “कल कुछ और कहा था, आज कुछ और कह रहा है।” लेकिन इसके पीछे कारण होते हैं: प्रश्न पूछने का तरीका बदल जाना संदर्भ (context) बदल जाना नई जानकारी जुड़ जाना AI राय नहीं बदलता, बल्कि संभावनाओं की दोबारा गणना करता है। यह झूठ नहीं, गणित है। क्या ChatGPT को गलत बात कहने के लिए उकसाया जा सकता है? हाँ, यह संभव है। यदि: प्रश्न पक्षपातपूर्ण हो सवाल में ही गलत मान्यता हो उपयोगकर्ता किसी निष्कर्ष को जबरदस्ती निकलवाना चाहे तो AI गलत या भ्रामक उत्तर दे सकता है। लेकिन यहाँ गलती:...