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Showing posts with the label ashtags#आध्यात्मिकता#ईश्वरऔरमनुष्य#दर्शन#भक्ति#कविताऔरविचार#मानविकआस्था

Meta Descriptionईश्वर, मनुष्य, पाप, करुणा और अपनापन पर आधारित एक गहरा आध्यात्मिक और दार्शनिक लेख।Keywordsआध्यात्मिक कविता, ईश्वर और मनुष्य, भक्ति और प्रश्न, करुणा और पाप, आध्यात्मिक दर्शनHashtags#आध्यात्मिकता#ईश्वरऔरमनुष्य#दर्शन#भक्ति#कविताऔरविचार#मानविकआस्था

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🌿 शीर्षक “हे ईश्वर, मैं तुम्हारे लिए पराया क्यों हूँ?” 📝 कविता (हिंदी) मैं पराया क्यों हूँ? हे ईश्वर, मुझे स्वतंत्र कर, डर की जंजीरों से मुक्त कर। मैं पापी हूँ—यह मानता हूँ, पर नर्क ही क्या मेरा अंत समझूँ? यह आकाश, धरती, अग्नि, पवन, सब तो तेरी ही देन हैं जीवन। जब सब कुछ तुझसे जुड़ा हुआ, तो मैं ही क्यों अलग ठहरा हुआ? न राज चाहिए, न सम्मान, बस तेरे हृदय में थोड़ा स्थान। हे ईश्वर, यदि प्रेम ही तू है, तो मुझसे दूरी क्यों बनाता है? 🧠 विश्लेषण और दर्शन (हिंदी) यह कविता ईश्वर के विरुद्ध नहीं, ईश्वर के साथ संवाद है। यहाँ कवि अपने दोषों को स्वीकार करता है, पर एक गहरा प्रश्न भी उठाता है— यदि ईश्वर करुणा का स्रोत हैं, तो पापी मनुष्य उनके लिए पराया कैसे हो सकता है? यह रचना उस धार्मिक सोच को चुनौती देती है जहाँ डर को आस्था बना दिया गया है। यह कविता कहती है कि— प्रश्न करना अविश्वास नहीं, बल्कि जीवित विश्वास का संकेत है। दार्शनिक रूप से यह कविता मानव-केन्द्रित अध्यात्म की बात करती है, जहाँ ईश्वर न्यायाधीश से पहले एक आश्रय हैं। 📝 ब्लॉग (हिंदी) हे ईश्वर, मैं तुम्हारे लिए पराया क्यों हूँ...