धर्म से प्रेम, धर्म के नाम पर राजनीति नहींबेलडांगा–मुर्शिदाबाद प्रसंग और पश्चिम बंगाल की राजनीतिक वास्तविकताभूमिकाभारत में धर्म केवल आस्था नहीं, बल्कि जीवन की एक स्वाभाविक धारा है। लेकिन इतिहास बार-बार यह साबित करता है कि जब धर्म को राजनीति का हथियार बनाया जाता है, तब समाज में दरारें पड़ने लगती हैं। पश्चिम बंगाल के बेलडांगा से जुड़ी हालिया घटनाएँ एक बार फिर यह सवाल उठाती हैं—p
धर्म से प्रेम, धर्म के नाम पर राजनीति नहीं बेलडांगा–मुर्शिदाबाद प्रसंग और पश्चिम बंगाल की राजनीतिक वास्तविकता भूमिका भारत में धर्म केवल आस्था नहीं, बल्कि जीवन की एक स्वाभाविक धारा है। लेकिन इतिहास बार-बार यह साबित करता है कि जब धर्म को राजनीति का हथियार बनाया जाता है, तब समाज में दरारें पड़ने लगती हैं। पश्चिम बंगाल के बेलडांगा से जुड़ी हालिया घटनाएँ एक बार फिर यह सवाल उठाती हैं— 👉 क्या धर्म से प्रेम करना, धर्म आधारित राजनीति का समर्थन करना है? बहुत से लोगों के लिए उत्तर स्पष्ट है—नहीं। साथ ही, इन घटनाओं ने एक और सच्चाई उजागर की है: मौजूदा परिस्थिति में तृणमूल कांग्रेस सरकार को सत्ता से हटाना बेहद कठिन है। यह लेख किसी भी प्रकार की नफ़रत या उकसावे के लिए नहीं, बल्कि यथार्थ-आधारित सामाजिक-राजनीतिक विश्लेषण के उद्देश्य से लिखा गया है। धर्म और धर्म के नाम पर राजनीति में अंतर धर्म से प्रेम का अर्थ है— आस्था का सम्मान संस्कृति और परंपरा की रक्षा व्यक्तिगत आध्यात्मिक स्वतंत्रता जबकि धर्म के नाम पर राजनीति का अर्थ अक्सर होता है— वोट बैंक बनाना डर और विभाजन की राजनीति “हम बनाम वे” क...