शब्द कभी-कभी चुभते हैं—लेकिन केवल तभीजब हम उन्हें अपने भीतर जगह देते हैं।यह कविता याद दिलाती है—अपमान छोटा हैआपकी गरिमा बड़ी हैनीरवता की शक्ति अनमोल हैऔर आत्मसम्मान—सभी लड़ाइयों से बड़ा हथियार हैजब कोई आपको छोटा दिखाना चाहे,तब एक ही मार्ग है—खुद को ऊँचा बनाए रखना।यही सच्ची जीत है।---कीवर्ड / हैशटैग#आत्मसम्मान#मानसिकशक्ति#खामोशीकीताकत#हिन्दीकविता#हिन्दीब्लॉग#दर्शन#मोटिवेशन#अपमानसेऊपर#जीवनशिक्षा#आत्मविश्वास
🌟 शीर्षक: “अपमान से ऊपर उठने की ताकत” --- १. हिन्दी कविता अपमान से ऊपर अगर मुझे पागल कहकर तुम्हें मिलती है कोई खुशी, तो जान लो—मेरी खामोशी तुम्हारी आवाज़ से है बड़ी। मेरे मन पर इसका कोई असर नहीं, न चोट, न कोई दाग, क्योंकि तुम्हारी सोच तो गिरती है— मेरे घुटनों से भी नीचे की राह। मैं चलता हूँ सम्मान के साथ, तुम्हारे शब्दों से बेअसर, मेरा सच है मेरी ढाल, और आत्मसम्मान—मेरा असल घर। तुम्हारे अपशब्द धुएँ-से उड़ जाते हैं, तुम्हारा निर्णय मिट्टी में मिल जाता है, मैं अपनी नीरव शक्ति से उठता हूँ, जहाँ आत्म-विश्वास मुस्कुराता है। --- २. विश्लेषण व दर्शन यह कविता जीवन की वे परिस्थितियाँ दिखाती है जहाँ लोग अपमान करके स्वयं को श्रेष्ठ साबित करना चाहते हैं— लेकिन वक्ता यह स्पष्ट कर देता है कि: जिसे अपने मूल्य का ज्ञान है उसे कोई भी शब्द हिला नहीं सकता। मुख्य संदेश— आत्मसम्मान भीतर से आता है। किसी की आलोचना या ताना उसका मूल्य तय नहीं कर सकता। “घुटनों से नीचे” यह शारीरिक नहीं— सोच, चरित्र और दृष्टि की नीचता का प्रतीक है। खामोशी की ताकत जब बात करने का कोई लाभ नहीं, तब न बोलना ही सबसे बड़ा उ...