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शीर्षक:“मैं तुम्हारा हूँ— पर क्या मैं सिर्फ तुम्हारे दिल का खिलौना हूँ?”---✨ भाग 1 — कविता (सिर्फ हिन्दी)“मैं तुम्हारा हूँ— कोई खिलौना नहीं”मैं तुम्हारा हूँ—ना कोई उधार की सांस,ना किसी पल भर की शीर्षक:“मैं तुम्हारा हूँ— पर क्या मैं सिर्फ तुम्हारे दिल का खिलौना हूँ?”---✨ भाग 1 — कविता (सिर्फ हिन्दी)“मैं तुम्हारा हूँ— कोई खिलौना नहीं”मैं तुम्हारा हूँ—ना कोई उधार की सांस,ना किसी पल भर की आवाज़जो बदलती हवा में खो जाए।तुम्हारा सपना क्या है?धीरे से बताओ, बताओ,

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🌙 शीर्षक: “मैं तुम्हारा हूँ— पर क्या मैं सिर्फ तुम्हारे दिल का खिलौना हूँ?” --- ✨ भाग 1 — कविता (सिर्फ हिन्दी) “मैं तुम्हारा हूँ— कोई खिलौना नहीं” मैं तुम्हारा हूँ— ना कोई उधार की सांस, ना किसी पल भर की आवाज़ जो बदलती हवा में खो जाए। तुम्हारा सपना क्या है? धीरे से बताओ, क्योंकि मैंने अपनी तमाम इच्छाओं को मुड़कर रख दिया है तुम्हारे आसमान को जगह देने के लिए। क्या मैं तुम्हारे दिल का खिलौना हूँ? जिसे तुम लंबी रातों में करीब रखो, और सुबह की हलचल आते ही भुला दो? या मैं वह सच हूँ जिससे तुम नज़र चुराते हो— क्योंकि मेरी मोहब्बत कुछ मांगती नहीं, सिर्फ देती है, बिना शोर। मैं तुम्हारा हूँ— तुम्हारे कहने से नहीं, बल्कि इसलिए कि कुछ प्रेम जन्म से ही समर्पित होते हैं। मगर बताओ… तुम्हारा सपना कभी मेरी ओर लौटेगा? क्या वह मुझे उसी कोमलता से थामेगा जिस कोमलता से मैंने तुम्हें हर ग़लतफ़हमी, हर दूरी, हर ख़ामोशी में थामा है? --- ✨ भाग 2 — विश्लेषण और दर्शन (सिर्फ हिन्दी) आपकी मूल पंक्ति— “मैं तो तुम्हारा हूँ। तुम्हारा सपना क्या है? क्या मैं तुम्हारे दिल का खिलौना हूँ?” एक बहुत गहरे भावनात्मक क...