क्या महाराणा प्रताप के साथ युद्ध करने वाले सूरी मुसलमान ‘जिहादी’ या ‘आतंकवादी’ थे?इतिहास, स्मृति और आधुनिक लेबलिंग की एक गंभीर पड़ताल (भाग–3)**12. धर्म बनाम निष्ठा: मध्यकालीन भारत की वास्तविक सोचआज हम इतिहास को अक्सर आधुनिक चश्मे से देखते हैं—राष्ट्रवादधार्मिक पहचानराजनीतिक विचारधाराएँ
**क्या महाराणा प्रताप के साथ युद्ध करने वाले सूरी मुसलमान ‘जिहादी’ या ‘आतंकवादी’ थे? इतिहास, स्मृति और आधुनिक लेबलिंग की एक गंभीर पड़ताल (भाग–3)** 12. धर्म बनाम निष्ठा: मध्यकालीन भारत की वास्तविक सोच आज हम इतिहास को अक्सर आधुनिक चश्मे से देखते हैं— राष्ट्रवाद धार्मिक पहचान राजनीतिक विचारधाराएँ लेकिन 16वीं शताब्दी का भारत इन अवधारणाओं से अलग था। उस समय किसी व्यक्ति की पहचान तय होती थी— वह किस शासक के प्रति निष्ठावान है वह किस भूमि और समाज की रक्षा कर रहा है वह सम्मान और आत्मसम्मान को कितना महत्व देता है धर्म व्यक्ति का निजी विषय था, राज्य और सेना का एकमात्र आधार नहीं। 📌 इसलिए एक मुस्लिम सेनानायक का एक हिंदू राजा के लिए लड़ना उस समय अस्वाभाविक नहीं था। 13. मुसलमान योद्धा हिंदू राजाओं के पक्ष में क्यों खड़े होते थे हकीम ख़ान सूरी जैसे योद्धाओं के निर्णय के पीछे कई कारण थे— (क) क्षेत्रीय स्वतंत्रता मेवाड़ की स्वतंत्रता अकबर के साम्राज्यवादी विस्तार से खतरे में थी। (ख) सत्ता संघर्ष सूरी और अफ़ग़ान समूहों का मुग़लों से राजनीतिक टकराव था, जो धार्मिक नहीं था। (ग) शासक का चरित्र मह...