गणतंत्र दिवस के आँसू: लिखे गए और अनलिखे बलिदानहिंदी ब्लॉग – भाग 1भूमिका: क्यों गणतंत्र दिवस पर आँखें नम हो जाती हैंगणतंत्र दिवस को हम अक्सर परेड, झंडे, भाषण और उत्सव के रूप में देखते हैं। लेकिन कई लोगों के लिए यह दिन केवल उत्सव का नहीं होता—यह स्मरण का दिन होता है।जब देशभक्ति के गीत बजते हैं, तो मन गर्व से भरता है, लेकिन उसी के साथ आँखें भीग जाती हैं। यह आँसू कमज़ोरी के नहीं होते। ये आँसू उस एहसास के होते हैं कि आज जो आज़ादी हमें मिली है, वह किसी एक दिन या किसी एक व्यक्ति की देन नहीं है।
गणतंत्र दिवस के आँसू: लिखे गए और अनलिखे बलिदान हिंदी ब्लॉग – भाग 1 भूमिका: क्यों गणतंत्र दिवस पर आँखें नम हो जाती हैं गणतंत्र दिवस को हम अक्सर परेड, झंडे, भाषण और उत्सव के रूप में देखते हैं। लेकिन कई लोगों के लिए यह दिन केवल उत्सव का नहीं होता—यह स्मरण का दिन होता है। जब देशभक्ति के गीत बजते हैं, तो मन गर्व से भरता है, लेकिन उसी के साथ आँखें भीग जाती हैं। यह आँसू कमज़ोरी के नहीं होते। ये आँसू उस एहसास के होते हैं कि आज जो आज़ादी हमें मिली है, वह किसी एक दिन या किसी एक व्यक्ति की देन नहीं है। हर अधिकार के पीछे कोई न कोई त्याग छुपा है। हर संवैधानिक पंक्ति के पीछे कोई न कोई मौन पीड़ा खड़ी है। यह ब्लॉग उन्हीं आँसुओं से जन्म लेता है—जो भावना से नहीं, चेतना से बहते हैं। इतिहास में नहीं, स्मृति में जीवित: मुंशी अमीरुद्दीन मेरी माँ के नाना को लोग मौलाना या मुंशी अमीरुद्दीन के नाम से जानते थे। पारिवारिक स्मृति और हमारे विद्यालय के प्रधानाचार्य की बातों के अनुसार, वे— एक स्वतंत्रता सेनानी थे एक अप्रसिद्ध (unreputed) कवि और कहानीकार थे और स्वतंत्रता आंदोलन के कारण कारावास झेल चुके थे ...