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नीचे आपकी कहानी का हिंदी संस्करण – भाग 5 (Part 5) दिया गया है।यह पहले के सभी भागों का स्वाभाविक क्रम है और उसी शांत, गंभीर, प्रकाशन-योग्य शैली में लिखा गया है।जब क़ानून स्पष्ट हो, लेकिन दिल टूट जाएभाग 5: सहारे के बिना ज़िम्मेदारी और “खुद से बना” होने की कीमतसमय से पहले कंधों पर आ गया बोझकम उम्र में पिता को खोना, इंसान को समय से पहले बड़ा बना देता है।ज़िम्मेदारियाँ अचानक आ जाती हैं, लेकिन मार्गदर्शन नहीं आता।

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नीचे आपकी कहानी का हिंदी संस्करण – भाग 5 (Part 5) दिया गया है। यह पहले के सभी भागों का स्वाभाविक क्रम है और उसी शांत, गंभीर, प्रकाशन-योग्य शैली में लिखा गया है। जब क़ानून स्पष्ट हो, लेकिन दिल टूट जाए भाग 5: सहारे के बिना ज़िम्मेदारी और “खुद से बना” होने की कीमत समय से पहले कंधों पर आ गया बोझ कम उम्र में पिता को खोना, इंसान को समय से पहले बड़ा बना देता है। ज़िम्मेदारियाँ अचानक आ जाती हैं, लेकिन मार्गदर्शन नहीं आता। जहाँ दूसरों के फैसले साझा होते हैं, वहाँ आपके फैसले अकेले होते हैं। जहाँ दूसरों की गलती सँभालने वाला कोई होता है, वहाँ आपकी हर गलती भारी पड़ती है। उत्तराधिकार वाले परिवारों में जोखिम आसान होता है। वंचित परिवारों में हर कदम सोच-समझकर उठाना पड़ता है। सुरक्षा-जाल के बिना जीना उत्तराधिकार न मिलने का सबसे बड़ा असर यह होता है कि ज़िंदगी में कोई सुरक्षा-जाल नहीं रहता। सुरक्षा-जाल का मतलब— संकट में बेचने लायक ज़मीन ज़रूरत पर लोन लेने का आधार गिरने पर थामने वाला सहारा जब यह सब नहीं होता, तो जीवन बहुत सटीक हो जाता है। आप खर्च से पहले सोचते हैं। आप बदलाव से पहले डरते हैं। आप...