जब ज्ञान ही आपका ईश्वर बन जाए(भाग 2 – गहन विस्तार)ज्ञान: एक आंतरिक क्रांतिजब कोई व्यक्ति सचमुच ज्ञान के मार्ग पर चलने का निर्णय लेता है, तो उसके भीतर एक शांत लेकिन गहरी क्रांति शुरू होती है।यह केवल किताबें पढ़ना नहीं है।यह केवल जानकारी इकट्ठा करना नहीं है।यह अपने विचारों, धारणाओं और सीमाओं को बदलने की प्रक्रिया है।पुरानी मान्यताएँ प्रश्नों के घेरे में आती हैं।अनुचित भय टूटने लगते हैं।झूठी धारणाएँ धीरे-धीरे समाप्त होती हैं।इसीलिए बहुत से लोग ज्ञान से बचते हैं।क्योंकि ज्ञान परिवर्तन लाता है।ज्ञान आरामदायक अज्ञान को स्वीकार नहीं करता।ज्ञान बहानों को टिकने नहीं देता।
जब ज्ञान ही आपका ईश्वर बन जाए (भाग 2 – गहन विस्तार) ज्ञान: एक आंतरिक क्रांति जब कोई व्यक्ति सचमुच ज्ञान के मार्ग पर चलने का निर्णय लेता है, तो उसके भीतर एक शांत लेकिन गहरी क्रांति शुरू होती है। यह केवल किताबें पढ़ना नहीं है। यह केवल जानकारी इकट्ठा करना नहीं है। यह अपने विचारों, धारणाओं और सीमाओं को बदलने की प्रक्रिया है। पुरानी मान्यताएँ प्रश्नों के घेरे में आती हैं। अनुचित भय टूटने लगते हैं। झूठी धारणाएँ धीरे-धीरे समाप्त होती हैं। इसीलिए बहुत से लोग ज्ञान से बचते हैं। क्योंकि ज्ञान परिवर्तन लाता है। ज्ञान आरामदायक अज्ञान को स्वीकार नहीं करता। ज्ञान बहानों को टिकने नहीं देता। ज्ञान आपको आपके वास्तविक स्वरूप से परिचित कराता है। और स्वयं को पहचानना ही विकास की शुरुआत है। जानने का साहस सत्य को जानना आसान नहीं। क्योंकि सत्य हमेशा सुखद नहीं होता। कई बार सत्य हमारे अहंकार को तोड़ देता है। कई बार वह हमारी गलतियों को उजागर कर देता है। लेकिन यही टूटन हमें मजबूत बनाती है। बहुत से लोग निश्चित लेकिन गलत विचारों को पकड़े रहते हैं, क्योंकि अनिश्चित लेकिन सच्चाई का सामना करना कठिन है। पर ...