हिंदी – भाग 2चुनावी रणनीति, ऐतिहासिक उदाहरण और ध्रुवीकरण की राजनीति की सीमाएँऐतिहासिक संदर्भ: जब बयान उल्टा असर डालते हैंभारतीय चुनावी इतिहास में कई ऐसे उदाहरण मिलते हैं जहाँ पहचान-आधारित तीखे राजनीतिक बयान अपेक्षित लाभ देने के बजाय उल्टा परिणाम लेकर आए। अक्सर यह मान लिया जाता है कि कठोर भाषा से अल्पसंख्यक मतदाता बँटेंगे या बहुसंख्यक समर्थन और मज़बूत होगा। लेकिन व्यवहार में, ऐसे बयान प्रायः लक्षित समुदाय के भीतर रक्षात्मक एकजुटता पैदा करते हैं।ऐसी परिस्थितियों में अल्पसंख्यक मतदाता—आपसी राजनीतिक मतभेदों को अस्थायी रूप से अलग रख देते हैं
हिंदी – भाग 2 चुनावी रणनीति, ऐतिहासिक उदाहरण और ध्रुवीकरण की राजनीति की सीमाएँ ऐतिहासिक संदर्भ: जब बयान उल्टा असर डालते हैं भारतीय चुनावी इतिहास में कई ऐसे उदाहरण मिलते हैं जहाँ पहचान-आधारित तीखे राजनीतिक बयान अपेक्षित लाभ देने के बजाय उल्टा परिणाम लेकर आए। अक्सर यह मान लिया जाता है कि कठोर भाषा से अल्पसंख्यक मतदाता बँटेंगे या बहुसंख्यक समर्थन और मज़बूत होगा। लेकिन व्यवहार में, ऐसे बयान प्रायः लक्षित समुदाय के भीतर रक्षात्मक एकजुटता पैदा करते हैं। ऐसी परिस्थितियों में अल्पसंख्यक मतदाता— आपसी राजनीतिक मतभेदों को अस्थायी रूप से अलग रख देते हैं शासन की कमियों से अधिक सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता देते हैं वैचारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक मतदान करते हैं यह दिखाता है कि राजनीति में नीतियों के साथ-साथ सामाजिक मनोविज्ञान और सामूहिक स्मृति भी निर्णायक भूमिका निभाती है। पहचान बनाम शासन: मतदाता का बदलता प्रश्न आज के मुस्लिम मतदाता एक-आयामी नहीं हैं। वे कई पहलुओं का आकलन करते हैं— रोज़गार और आर्थिक अवसर शिक्षा और भविष्य की संभावनाएँ महँगाई और जीवनयापन की लागत स्थानीय कानून-व्यवस्था लेकिन...