जब तुम्हारा दर्द मेरी दुनिया बन गयाभाग 2: टूटने के बाद स्वयं को फिर से पाना9️⃣ बहुत गहराई से प्रेम करने की छिपी हुई कीमतपहले भाग में हमने देखा कि सहानुभूति कैसे धीरे-धीरे आत्म-विलय में बदल सकती है। अब प्रश्न है—कुछ लोग प्रेम में खुद को पूरी तरह क्यों खो देते हैं?इसका उत्तर अक्सर हमारे अवचेतन डर में छिपा होता है।अत्यधिक देने वाले लोगों के भीतर अक्सर होता है:छोड़े जाने का डरखुद को पर्याप्त न समझनालगातार मान्यता की आवश्यकताबचपन की भावनात्मक उपेक्षामन के भीतर आवाज़ होती है:“अगर मैं इसे ठीक कर दूँगा, तो यह मुझे नहीं छोड़ेगा।”“अगर मैं और अधिक दूँगा, तो मैं योग्य बन जाऊँगा।”लेकिन डर पर आधारित प्रेम स्थायी नहीं होता।
🌿 जब तुम्हारा दर्द मेरी दुनिया बन गया भाग 2: टूटने के बाद स्वयं को फिर से पाना 9️⃣ बहुत गहराई से प्रेम करने की छिपी हुई कीमत पहले भाग में हमने देखा कि सहानुभूति कैसे धीरे-धीरे आत्म-विलय में बदल सकती है। अब प्रश्न है— कुछ लोग प्रेम में खुद को पूरी तरह क्यों खो देते हैं? इसका उत्तर अक्सर हमारे अवचेतन डर में छिपा होता है। अत्यधिक देने वाले लोगों के भीतर अक्सर होता है: छोड़े जाने का डर खुद को पर्याप्त न समझना लगातार मान्यता की आवश्यकता बचपन की भावनात्मक उपेक्षा मन के भीतर आवाज़ होती है: “अगर मैं इसे ठीक कर दूँगा, तो यह मुझे नहीं छोड़ेगा।” “अगर मैं और अधिक दूँगा, तो मैं योग्य बन जाऊँगा।” लेकिन डर पर आधारित प्रेम स्थायी नहीं होता। 🔟 सह-निर्भरता (Codependency): जब देखभाल नियंत्रण बन जाती है मनोविज्ञान में इसे सह-निर्भरता कहा जाता है। यह तब होती है जब: एक व्यक्ति की पहचान दूसरे को बचाने पर निर्भर हो जाती है भावनात्मक सीमाएँ धुंधली हो जाती हैं आत्म-मूल्य “ज़रूरी” होने पर आधारित हो जाता है शुरुआत में यह समर्पण जैसा लगता है। धीरे-धीरे यह घुटन में बदल जाता है। समस्या अधिक प्रेम नहीं ...