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अब प्रस्तुत है हिंदी – भाग 3“वो गलियाँ जहाँ तुम कभी आए ही नहीं” का गहन, आध्यात्मिक और आत्म-बोध से भरा विस्तार।वो गलियाँ जहाँ तुम कभी आए ही नहीं – भाग 3हार नहीं, जागरण की दिशाभाग 25: अप्राप्त प्रेम का आध्यात्मिक अर्थहर प्रेम मिलन के लिए नहीं होता।कुछ प्रेम हमारे भीतर की गहराई दिखाने आते हैं।जब आपने सच्चे मन से प्रेम किया,भले ही सामने वाला कभी नहीं आया,पर आपने अपने दिल की क्षमता पहचान ली।अप्राप्त प्रेम व्यर्थ नहीं होता।

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अब प्रस्तुत है हिंदी – भाग 3 “वो गलियाँ जहाँ तुम कभी आए ही नहीं” का गहन, आध्यात्मिक और आत्म-बोध से भरा विस्तार। वो गलियाँ जहाँ तुम कभी आए ही नहीं – भाग 3 हार नहीं, जागरण की दिशा भाग 25: अप्राप्त प्रेम का आध्यात्मिक अर्थ हर प्रेम मिलन के लिए नहीं होता। कुछ प्रेम हमारे भीतर की गहराई दिखाने आते हैं। जब आपने सच्चे मन से प्रेम किया, भले ही सामने वाला कभी नहीं आया, पर आपने अपने दिल की क्षमता पहचान ली। अप्राप्त प्रेम व्यर्थ नहीं होता। वह बताता है— आप महसूस करना जानते हैं आप जोखिम लेने का साहस रखते हैं आप दिल खोलने से नहीं डरते आप गहरे इंसान हैं बहुत लोग कभी इतना गहरा महसूस ही नहीं कर पाते। आपने किया। यही आपकी ताकत है। भाग 26: अहंकार और अस्वीकृति का घाव कभी-कभी दर्द प्रेम का नहीं, अहंकार का होता है। हम पूछते हैं— “क्या मैं पर्याप्त नहीं था?” “उन्होंने मुझे क्यों नहीं चुना?” “मुझमें क्या कमी थी?” लेकिन प्रेम प्रतियोगिता नहीं है। अस्वीकृति का अर्थ अयोग्यता नहीं है। दो लोग दोनों अच्छे हो सकते हैं, फिर भी एक-दूसरे के लिए सही न हों। जब यह समझ आता है, तो अपमान का दर्द कम होने लगता है। भा...