दिल की गहराई से धर्म प्रेमबनामउन्मादी (मजनू-सदृश) आसक्तिभाग 3 – आंतरिक संघर्ष, परिवर्तन और भविष्य की भक्तिमेटा विवरण (Meta Description)इस भाग में हम दिल से किए गए धर्म प्रेम और उन्मादी आसक्ति के बीच के आंतरिक अंतर को समझते हैं। विषय है आत्म-परिवर्तन, भावनात्मक नियंत्रण, सामाजिक जिम्मेदारी और आने वाली पीढ़ियों पर इसका प्रभाव।⚠️ डिस्क्लेमरयह लेख केवल दार्शनिक और शैक्षिक चिंतन के उद्देश्य से लिखा गया है। इसका उद्देश्य किसी भी धर्म, विचारधारा या समुदाय की आलोचना करना नहीं है। यहाँ चर्चा मानव व्यवहार, मानसिकता और आत्म-विकास पर केंद्रित है।प्रस्तावना: असली संघर्ष भीतर हैपहले भाग में हमने दो प्रकार के धर्म प्रेम की चर्चा की—संतुलित, दिल से किया गया प्रेम
दिल की गहराई से धर्म प्रेम बनाम उन्मादी (मजनू-सदृश) आसक्ति भाग 3 – आंतरिक संघर्ष, परिवर्तन और भविष्य की भक्ति मेटा विवरण (Meta Description) इस भाग में हम दिल से किए गए धर्म प्रेम और उन्मादी आसक्ति के बीच के आंतरिक अंतर को समझते हैं। विषय है आत्म-परिवर्तन, भावनात्मक नियंत्रण, सामाजिक जिम्मेदारी और आने वाली पीढ़ियों पर इसका प्रभाव। ⚠️ डिस्क्लेमर यह लेख केवल दार्शनिक और शैक्षिक चिंतन के उद्देश्य से लिखा गया है। इसका उद्देश्य किसी भी धर्म, विचारधारा या समुदाय की आलोचना करना नहीं है। यहाँ चर्चा मानव व्यवहार, मानसिकता और आत्म-विकास पर केंद्रित है। प्रस्तावना: असली संघर्ष भीतर है पहले भाग में हमने दो प्रकार के धर्म प्रेम की चर्चा की— संतुलित, दिल से किया गया प्रेम और उन्मादी, असंतुलित प्रेम दूसरे भाग में हमने समझा कि “धर्म” केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि विचार, ज्ञान और सिद्धांत भी हो सकते हैं। अब तीसरे भाग में हम उस मूल प्रश्न तक पहुँचते हैं— संघर्ष धर्मों के बीच नहीं है। संघर्ष विचारधाराओं के बीच भी नहीं है। संघर्ष वास्तव में मनुष्य के भीतर है। यह एक आंतरिक युद्ध है— अहंकार बनाम व...